Thursday, August 9, 2012

माफियाओं के संरक्षण में सपा महासचिव ने किया एक्स-प्रेस वे का उद्घाटन
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समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव ने आज ग्रेटर नॉएडा में यमुना एक्स-प्रेस वे के शुभारम्भ करते हुए अथोरिटी के अधिकारीयों से मांग की के इस पर गाड़ियों के चलने की रफ़्तार १०० किलोमीटर प्रति घंटे के बजे १२० की जाये | उन्होंने यह भी कहा के इसे लखनऊ तक बनाया जायेगा | इस अवसर पर जहाँ प्रवीन कुमार एस एस पी नॉएडा जैसे इमानदार अफसर तो थे ही साथ ही गुड्डू पंडित जैसे माफिया भी सपा महासचिव के साथ खड़े नजर आये |
नीरज महेरे (पत्रकार)
०९९१०४३८८०३

Wednesday, April 11, 2012

सरकार के मालिक के ही घर में तानाशाही


इटावा : इटावा कहने को सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का गृह जनपद है, लेकिन यहाँ मायावती के शासन काल से ही पुलिस की गुंडई कायम है, जो अब भी बदस्‍तूर जारी है. हद तो तब हो गयी जब इटावा में मायावती सरकार से तैनात  एसएसपी ने समाजवादी पार्टी की आँखों का तारा बनने के लिए दो पढ़ने वाले युवकों को अपराधी बना डाला. हत्या, लूट, बलात्कार, जुआ, सट्टा, मादक पदार्थों की बिक्री समेत तमाम आपराधिक कृत्‍य जिले में खुले आम हो रहा है, उन पर रोक नहीं लग पा रही है और नए अपराधी बनाने की तैयारी की जा रही है |.
एसएसपी ऐसे सब इंस्‍पेक्‍टरों को थाना इंचार्ज बना रहे हैं, जिनको ठीक से चौकी चलाने का भी शऊर नहीं है. अपराधियों पर अंकुश लगाने में नाकाम एसएसपी अब मायावती के खास बनने के बाद अब सपा के नजदीक जाने को ब्‍याकुल हैं. इसी क्रम में इन्‍होंने चक्रव्‍यूह रच कर दो पढ़ने वाले छात्रों को बेवजह अपराधी बना डाला. ''गुनहगारों में शामिल हूं, गुनाहों से नहीं वाकिफ, सच जानते हैं हम, खता क्‍या है खुदा जाने'' कुछ इसी तरह का हाल जिले के एसएसपी राजेश मोदक डी राव का है. बसपा शासन काल में बसपाइयों के खास हुआ करते थे. अब प्रदेश में सत्‍ता परिवर्तित हुई तो सपाई बनने का नशा चढ़ गया है. इसी कोशिश में एसएसपी ने मोहम्‍मद हाशिम और मनोज कुमार नाम के दो छात्रों को इस आरोप में पकड़ा कि वह शस्‍त्र लाइसेंस बनवाने के लिए सैफई ब्‍लॉक प्रमुख तेज प्रताप सिंह का नाम लेकर दबाव बना रहे थे, तेज प्रताप सिंह सपा मुखिया के पौत्र हैं.
प्रेस को बुलाकर पूरे मामले का एसएसपी ने खुलासा किया लेकिन जब एक पत्रकार ने एसएसपी से सवाल किया कि आप प्रेस के लोगों का फोन नहीं उठाते तो एक अपराधी का फोन कैसे उठा लिया, इस सवाल पर एसएसपी को सांप सूंघ गया. उनकी हंसी बता रही थी कि पूरा मामला झूठ का पुलिंदा है. यह पूरा षड्यंत्र चंद पत्रकार और एसएसपी के दिमाग की उपज था, समाजवादी पार्टी का खास बनने के लिए. प्रेस कांफ्रेंस के दौरान एसएसपी एक पार्टी नेता की तरह खुलासा कर रहे थे कि जबकि नवरात्र के दिन पुलिस की गोली से तीन देवी भक्‍त मारे गए, दो दिन पूर्व एक सपा कार्यकर्ता की हत्‍या हो चुकी है. पर किसी भी मामले का पुलिस खुलासा नहीं कर सकी है, किसी की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है. पूरे जनपद में अपराध चरम पर है.
मुख्‍यमंत्री का गृह जनपद अपराधियों का अड्डा बना हुआ है. एसएसपी सपा के खास बनने के लिए जिस सब इंस्‍पेक्‍टर के नाम के आगे यादव लिखा गया है उसको थानेदार बना रहे हैं, सीनियर दारोगा हाशिए पर ढकेल दिए गए हैं. इटावा शहर का सबसे महत्‍वपूर्ण थाना, जहां सपा के मुखिया मुलायम सिंह यादव तथा वरिष्‍ठ नेता रामगोपाल यादव का आवास है, उस थाने का इंचार्ज ऐसे सब इंस्‍पेक्‍टर को बना दिया, जिसे ठीक से वर्दी पहनने का भी शऊर नहीं है. जब सीएम के जनपद का यह हाल है तो पूरे प्रदेश के हालत का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है. पुलिस ने जिन दो छात्रों को पकड़ा है उनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है. मनोज कुमार हेवरा डिग्री कालेज का छात्र है जबकि हाशिम मध्‍य प्रदेश के भि़ड जनपद में पढ़ता है. दोनों ही जसवंतनगर के लुधपुरा गांव के रहने वाले हैं.
एसएसपी का कहना है कि पहले भी ये लोग मंत्री जी का नाम लेकर शस्‍त्र लाइसेंस बनवाते थे. एसएसपी यह भी भूल गए कि पहले बसपा की सरकार थी तो मंत्री जी यानी शिवपाल यादव का ना क्‍यों लेंगे ये छात्र. अभी तो मंत्रिमंडल के गठन को अभी एक माह भी नहीं हुआ है. माया के मायावी अधिकारी जब तक मुख्‍यमंत्री के जनपद में तैनात हैं तब तक अपराध और अपराधियों पर अंकुश नहीं लगाया जा सकता, क्‍योंकि ये पुलिस अधिकारी अपनी पूरी ऊर्जा समाजवादी पार्टी के आंखों का तारा बनने में ही लगा रहे हैं. किसी पत्रकार ने भी यह जानने का प्रयास नहीं किया कि मामले में कितनी सच्‍चाई है, जो एसएसपी ने कहा वही पत्‍थर की लकीर मानकर छाप दिया, क्‍योंकि पांच वर्ष तक ये पत्रकार भी बसपाइयों की रोटी के टुकड़ों पर पलते रहे, अब समाजवादी पार्टी की नजरों में छाने के लिए कुछ भी लिख सकते हैं.
जब इन पत्रकारों का कोई अपना पुलिस के जाल में फंसला है तो लिखते हैं कि पुलिस की गुंडई चल रही है. परन्‍तु इस मामले में यह जानने की जरूरत भी नहीं समझी कि इन छात्रों का कोई आपराधिक इतिहास है कि नहीं, ये दोषी हैं या नहीं. एसएसपी की प्रेस वार्ता सुनकर कोई आम आदमी भी बता देगा कि सच्‍चाई क्‍या है. प्रेस कवर कर रहे पत्रकार एसएसपी के बयान को गीता का उपदेश मानकर ग्रहण कर रहे थे. पर इस बारे में जरा भी ध्‍यान नहीं दिया कि अगर ये दोनों छात्र गलत फंसाए गए तो ये भविष्‍य में बड़े अपराधी भी बन सकते हैं.|

Monday, January 16, 2012

क्या यही है मुलायम का समाजवाद


उत्तर प्रदेश में बसपा के बाद सत्ता की सबसे बड़ी दावेदार समाजवादी पार्टी को माना जा रहा है। सपा और खासकर 73 वर्षीय मुलायम सिंह के लिए यह विधान सभा और 2014 में होने वाले आम चुनाव उम्र के हिसाब से काफी मायने रखते हैं। कुछ राजनैतिक पंडित तो यहां तक भविष्यवाणी कर रहें हैं कि उक्त चुनाव मुलायम के नेतृत्व में लड़े जाने वाले आखिरी चुनाव हो सकते हैं। इसके बाद सपा को कोई न कोई नया कर्णधार चाहिए ही होगा। यह नया कर्णधार कौन होगा, यह प्रश्न भविष्य के गर्भ में छिपा है। लेकिन उम्मीद यही जताई जा रही है कि मुलायम अपने बाद भी सपा की बागडोर अपने परिवार में ही रखना चाहेंगे।

   प्रतीक 2014 के आम चुनाव (लोकसभा) में समाजवादी पार्टी की ओर से साइकिल  की सवारी कर सकते हैं। उन्हें मुलायम अपने वर्चस्व वाली किसी संसदीय सीट से अपना प्रत्याशी बना सकते हैं। यह सीट संभल, बदायूं या बेहद उम्मीद है कि इटावा की भी हो सकती है। परिवार को छोड़कर करीब-करीब सभी पुराने समाजवादी उनसे किनारा करके चले गए हैं। राज बब्बर, अमर सिंह, बेनी प्रसाद वर्मा, रशीद मसूद काफी लम्बी लिस्ट है। मोहन सिंह को भी डीपी यादव प्रकरण के बाद किनारे कर दिया गया है। अब पार्टी में नेताओं के नाम पर आजम खां को छोड़कर परिवार वाले ही बचे हैं।
    उम्र के साथ मुलायम की हनक और धमक भी कम हो गई है। अब नेता जी पर दबाव डालकर उनका निर्णय बदलवा लिया जाता है। सपा प्रमुख को करीब से जानने वालो का कहना है कि नेताजी बात के धनी हुआ करते थे, उनकी बात पत्थर की लकीर होती थी, इसकी वजह से उन्हें कई बार नुकसान भी उठाना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी इसकी चिंता नहीं की। यह बात अब नेताजी में नहीं रही। इसी का फायदा उनका परिवार उठा रहा है। मुलायम को कुछ फैसले परिवार के दबाव में लेने पड़ रहे हैं तो कई फैसले पारिवारिक दवाब में बदलने पड़ रहे हैं। पत्नी साधना सिंह की चचेरी बहन मधु गुप्ता को मुलायम लखनऊ का मेयर बनाने और सांसद बनाने की कोशिश भी कर चुके हैं।

   मुलायम चौतरफा परेशानियों से घिर रहे हैं। कल्याण के कारण मुसलमान उनसे नाराज हैं तो छोटे भाई अमर सिंह की ‘बेवफाई’ के बाद पार्टी धन संकट से भी जूझ रही है। पैसे की कमी के कारण प्रचार-प्रसार का काम ठप पड़ा है। आर्थिक तंगी से जूझ रही समाजवादी पार्टी को अपने खर्चों में कटौती करनी पड़ रही है। बसपा के विज्ञापन प्रिंट से लेकर इलेक्ट्रानिक मीडिया तक में छाए हुए हैं, लेकिन सपा के पास विज्ञापन के लिए पैसा ही नहीं है। अमर के रहते सपा को कभी आर्थिक मोर्चे पर परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता था। आजम के चलते ही रामपुर की सांसद जया प्रदा भी मुलायम से दूर हो गई हैं। कन्नौज के छोटे सिंह यादव, गुन्नौर (बदायूं) उर्मिला यादव, विनोद उर्फ कक्का, जैसे दबंग नेता भी पार्टी से दूर चले गए हैं। यही नहीं अखिलेश और प्रतीक के आगे आने से शिवपाल यादव का राजनैतिक रूप से पीछे जाना भी कई प्रश्न चिन्ह खड़ा कर रहा है।