Saturday, September 3, 2011

देश की महापंचायत में भी जातिवाद : कमलेश

 दिल्ली ३ सितम्वर / नीरज महेरे / विशेष प्रतिनिधि एन सी आर अपडेट
बुलन्दशहर के सांसद को शिकायत है कि रेल मंत्रालय उनकी चिट्ठियों का जबाब देने की जहमत तो उठता है किन्तु न तो कार्यवाही की प्रगति से अवगत करता है और न ही जन समस्याओं के निवारण के लिए ठोस कार्यवाही ही करता है | लगातार रेल मंत्रालय की टाला - माटोली से सांसद कमलेश बाल्मीकि को यह पूरा भरोसा हो गया है कि वे दलित वर्ग में भी अंतिम पायदान से आते हैं इस कारण रेल मंत्रालय और रेल मंत्री उनकी बात को नहीं सुन रहे हैं |
   बुलन्दशहर के सांसद कमलेश बाल्मीकि विगत डेढ़ वर्ष से रेल मंत्री से मांग कर रहे हैं कि बुलन्दशहर - खुर्ज बाई पास पर रेलवे का अपर गामीं ( ओवर ब्रिज )  पुल  बनवाया  जाये जिससे आम जनता को रोजाना का जाम न झेलना पड़े और लोग समय से घर पहुंचें | इसके अलावावा उन्होंने दिल्ली से खुर्जा  आने वाली इ  एम् यू पैसेंजर को  बुलन्दशहर  तक बढ़ाने तथा बुलन्दशहर से दिल्ली वाया खुर्जा इ एम् यू चलवाने की मांग की थी |
   सांसद बाल्मीकि ने बताया कि इस मामले में रेल राज्य मंत्री ई० अहमद को २०  सितम्वर २०१० व १७ मार्च २०११ को भरत सिंह सोलंकी तथा १३ अप्रैल २०११ को के०एच० मुनियप्पा के आलावा रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष विवेक सहाय के कई पत्र मामले की जांच कराये जाने की बात लिखकर आते रहे हैं | किन्तु सांसद महोदय के पत्रों पर कार्यवाही न होने पर जब उन्होंने रेल मंत्री सुश्री ममता बनर्जी को स्वयं मिलकर पत्र देकर कार्यवाही की मांगें दोहराईं फिर भी जन समस्याओं के निराकरण के लिए कोई ठोस प्रयास रेल मंत्रालय अब तक नहीं कर सका है | जिससे सांसद कमलेश बाल्मीकि परेशां हैं और जनता यू०पी०ये० सरकार से बेहद नाराज है |
                

Saturday, August 27, 2011

सुबोध यादव हो सकते हैं बर्खास्त :यू.पी. सरकार

 
हाल के दिनों में उत्तर प्रदेश पुलिस वेलफेयर  एसोसिएशन  के नाम से गठित किये गये संगठन ने राज्य के आला पुलिस अफसरों की नाम मे दम कर दिया था। पुलिस के आला अफसरों ने इस संगठन के गठन से पहले ही इस संगठन से जुड़ने जा रहे पुलिस अफसरों पर अनुशासनहीनता के नाम से कार्रवाई करनी शुरू कर दी थी और जैसे ही चंद पुलिसजन संगठन के पदाधिकारी बने तो फिर बड़ी कार्रवाईयों की शुरुआत कर दी गई।
इस  उत्तर प्रदेश पुलिस वेलफेयर  एसोसिएशन के संस्थापक  सुबोध यादव को निलंबित तो पहले ही कर दिया गया था,  अब बर्खास्त करने की पूरी तैयारी कर ली गई है। सुबोध यादव को बर्खास्त करने से पहले नोटिस दे दिया गया,  जिस में सुबोध से नोटिस का जबाब मांगा गया है और जैसे ही नोटिस का जबाब दिया जायेगा,  वैसे ही सुबोध यादव को बर्खास्त कर दिया जायेगा।
सुबोध को दिये गये बर्खास्तगी नोटिस के अनुसार आरोपी आरक्षी 1545 सुबोध कुमार जो अनुभाग आगरा मे नियुक्त था, का स्थानान्तरण अपर पुलिस महानिदेशक रेलवे उप्र लखनऊ के आदेश संख्या पीआर-13-36/11(789) दिनांक 20-01-11 के आदेश के तहत गोरखपुर कर दिया गया,  लेकिन सुबोध ने वहां जाने की बजाय पुलिस संगठन के हितों में काम करना ज्यादा मुनासिब समझा और इसी परिप्रेक्ष्य में सुबोध के खिलाफ बर्खास्तगी की कारवाई तय मानी जा रही है।
इटावा में सुबोध यादव ने बर्खास्तगी नोटिस की प्रति को दिखलाते हुये कहा कि यह तो होना ही था। अधिकारी पहले से ही उसके खिलाफ बड़ी कार्रवाई का मन बनाये हुये थे और बर्खास्तगी से बड़ी कोई कार्रवाई क्या हो सकती है? सुबोध का कहना है कि मेरे पास सारे विकल्प खुले हुये हैं,  जैसे ही बर्खास्तगी की कार्यवाही की जायेगी सीधे अदालत के जरिये बहाली होकर सामने आऊंगा क्यों कि मेरे खिलाफ की जा रही कार्रवाई पूरी तरह से बदले की भावना से कार्रवाई की जा रही है,  इस कार्रवाई को पुलिस अमले का महाभ्रष्ट स्पेशल डीजीपी बृजलाल और रेलवे में एडीजे एके जैन के इशारे पर कार्रवाई को अमल में लाया जा रहा है।
इससे पहले सुबोध को तब निलंबित कर दिया गया था जब यूपी पुलिस ऐसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष नरेंद्र यादव का इटावा में उनका सर्मथकों की ओर से आगमन के दौरान जोशीला स्वागत कराया गया था। खुफिया रिर्पोटों के आधार पर सुबोध यादव को निलंबित कर दिया था। सुबोध यादव ने बताया कि साल 2011 के 15 जनवरी को यूपी पुलिस वेलफेयर ऐसोसिएशन के गठन की खबरें विभिन्न अखबारों में आना शुरू हो गई थी, मुझे संगठन में प्रदेश उपाध्यक्ष का पद दिया गया था जिसके बाद मैने उत्तर प्रदेश पुलिस वेलफेयर  एसोसिएशन का पंजीकरण आगरा में कराया और इस संस्था का संस्थापक बन गया  । इसी बीच 20 जनवरी को अपर पुलिस महानिदेशक रेलवे एके जैन ने मेरा ईएल अवकाश, जो 30 दिनी स्वीकृत था, को भी बिना किसी पूर्व सूचना दिये बीच में निरस्त कर जीआरपी गोरखपुर के लिये कार्यमुक्त कर दिया, लेकिन बाद में मिले सरकारी दस्तावेजों के आधार पर पता चला कि गोरखपुर के लिये तबादला कर दिया गया है, जब कि इस समय बीमारी के कारण मैंने ईएल अवकाश लेने के बाद घर पर रह कर उपचार करा रहा था।
सुबोध को मात्र 24 घंटे के भीतर ही गोरखपुर जा कर आमद कराने का आदेश दिया गया जब कि शासनादेश है कि एक सप्ताह का वक्त आमद के लिये मिलता है, ऐसे में सुबोध के खिलाफ आईपीएस अफसरों का उत्पीड़नात्मक रवैया यहीं से परीलक्षित हो गया था। 3 फरवरी को राजकीय रेलवे पुलिस, गोरखपुर के एसपी अमिताभ यश की ओर से निलंबित कर दिया गया है। राजकीय रेलवे पुलिस गोरखपुर अनुभाग के एसपी अमिताभ यश की ओर से 22 मार्च को पत्र सख्यां एस-29/2011 सुबोध को गुण दोष पर विचार किये बिना तत्काल प्रभाव से बहाल कर दिया गया। 2 मार्च को एक बार फिर से सुबोध को निलंबित कर दिया गया है।
सुबोध को पुलिस सेवा मे 16 साल काम करते हुये हो गये हैं और अपने हक की बात कहना क्या बुरा है? सुबोध का आरोप है कि आईपीएस अफसरों की घोटालेबाजी को लेकर आरटीआई का इस्तेमाल करना और पुलिस संगठन में काम करना आईपीएस अफसरों को रास नहीं आ रहा है,  इसी लिये निलंबन जैसी कार्रवाई करके उत्पीड़न करने में लग गये है और गैर कानूनी ढंग से मेरे खिलाफ अब बर्खास्तगी का दस्तावेजी कार्रवाई तैयार करने में लग गये हैं। सुबोध का कहना है कि अपने खिलाफ की जा रही बर्खास्तगी की कार्रवाई को लेकर उच्च न्यायालय की शरण लेंगे ताकि आईपीएस अफसरों को बेनकाब किया जा सके।
सुबोध यादव ने आरटीई डालकर ली जानकारी :  पुलिस विभाग में हर साल करोड़ों की धांधली का खुलासा हुआ है। यह रकम है लावारिस मुर्दों की, इसे भी विभाग के अफसर नहीं छोड़ रहे हैं। वे हर साल इस मद की रकम हड़प जाते हैं और खमियाजा भुगतते हैं दरोगा और सिपाही, जो इन लावारिस शवों का पोस्टमार्टम व अंतिम संस्कार कराने जाते हैं। बरसों से हो रही ज्यादती के खिलाफ उत्तर प्रदेश पुलिस एसोसिएशन के उपाध्यक्ष सुबोध यादव ने आवाज उठाई है और उन्होंने प्रदेश के प्रमुख सचिव गृह से उत्तर प्रदेश पुलिस के चार लाख अराजपत्रित पुलिस कर्मियों के लिए न्याय की मांग की है।
उत्तर प्रदेश पुलिस वेलफेयर  एसोसिएशन के संस्थापक  सुबोध यादव ने जनसूचना अधिकार अधिनियम 2005 के अंतर्गत उत्तर प्रदेश पुलिस के मुखिया से जानकारी मांगी थी कि लावारिस शवों के अंतिम संस्कार के लिए शासन द्वारा क्या व्यवस्था मुकर्रर की गई है और इस मद में कितना धन दिये जाने का प्रावधान है. लम्बी टालमटोल के बाद पुलिस विभाग ने 5 जुलाई 2010   में एक पत्र और शासनादेश की छाया प्रति, जो प्रदेश के महामहिम राज्यपाल द्वारा जारी है,  के द्वारा न सिर्फ उनकी शंकाओं का निवारण हुआ, बल्कि बेहद चौंकाने वाली जानकारी भी मिली. पुलिस मुख्यालय के जनसूचना अधिकारी अशोक कुमार अपर पुलिस अधीक्षक ने जानकारी दी कि शासनादेश संख्या स०- 1753/26-2-99-500(13)/99  दिनांक 16 जुलाई के तहत यह राशि 500 रुपये थी,  यह व्यवस्था 17 नवम्बर 2008 से लागू की गयी थी, जिसे उत्तर प्रदेश के राज्यपाल के साथ प्रदेश के वित्त विभाग ने भी मंजूरी दी थी।
महंगाई दर में लगातार वृद्धि के कारण 17  नवम्बर 2008 के शासनादेश संख्या. डब्लू- 1733/ 6-पु-08-1500 (11) 98 टीसी -11 दिनांक 17 नवम्बर 2008  द्वारा 1500 रुपया कर दी गयी थी. आदेश में प्रदेश के महामहिम राज्यपाल ने खर्च का वर्गीकरण भी किया था, जिसके तहत 1500 रुपये में 200  रुपये कफन के 6 मीटर कपडे पर, 900 रुपये शव दहन की लकड़ी या कब्र की खुदाई पर और बाकी 400 रुपये शव को कब्रिस्तान या श्मशान ले जाने के किराये पर खर्च के लिए निर्धारित किये गये थे।
इस सनसनीखेज खुलासे के बाद सुबोध यादव ने बताया कि उन्होंने आज प्रदेश के प्रमुख सचिव गृह को एक शिकायती प्रार्थना पत्र भेजा है,  जिस में प्रदेश के 4 लाख पुलिसकर्मियों के साथ हो रही ज्यादती पर न्याय करने की मांग की है। इसी प्रार्थना पत्र में सुबोध यादव ने कहा है कि प्रदेश के पुलिस कर्मियों को नहीं पता है कि लावारिस शवों के अंतिम संस्कार के लिए शासन द्वारा 1500 रुपये प्रदत्त किये जाते हैं। थोड़े पुलिस कर्मियों को रुपये मिलने का तो पता है मगर यह पता नहीं है कि इस मद में कितना भुगतान निर्धारित है। इस रकम के लिए मोटी लिखा-पढ़ी और लम्बे इन्तजार आईपीएस अफसरों से स्थानान्तरण विभागीय कार्रवाई के डर से पुलिसकर्मीं शासन के रुपयों का लालच छोड़ देते हैं और अपनी जेब से रुपया खर्च कर लावारिस शवों का अंतिम संस्कार कराते हैं। बर्खास्तगी के मुहाने पर खडे़ सुबोध यादव का कहना है कि चाहे कोई भी कार्रवाई की जाये वो अपने मिशन से पीछे हटने वाले किसी भी सूरत में नहीं है।  
नीरज महेरे

Saturday, August 20, 2011

ये हैं इटावा के अन्ना

 
 भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ने का क्रम नया नहीं है | नजाने
कितने  लोग इस  राक्षस   से लड़कर  टूट गए पर  झुके नहीं | अन्ना हजारे की
आवाज को पूरा देशइस लिए सुन सका के पदम् विभूषण से अलंकृत एक ख्यातिलब्ध
व्यक्ति ने मुंबई से आकर देश की राजधानी दिल्ली में भ्रष्टाचार के खिलाफ
आवाज उठाई | न जाने कितने अन्ना हजारे गाँव और कस्बों में आज भी जूझ रहे
हैं | बहुतों ने इस लड़ाई में सबकुछ खो दिया लेकिन झुके नहीं | इटावा शहर
के इस्लामियां इंटर कालेज के एक शिक्षक  सिद्धगोपाल सिंह  चोहान ने
शिक्षा विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार से लड़ने की बहुत बड़ी कीमत चुकाई |
उन्हें आदर्श शिक्षक के रूप में वर्ष १९९३ में मिला राज्यपाल पदक सन १९९७
में बापस करने पड़ा |
जिस शिक्षक को राज्यपाल अथवा राष्टपति पदक मिलता है उसे दो
वर्ष का सेवा विस्तार लाभ भी दिया जाता है | इस्लामियां इण्टर कालेज में
हिंदी के शिक्षक श्री चोहान ने जब सेवा विस्तारण के लिए आवेदन किया तो
शिक्षा निदेशालय में व्याप्त भ्रष्टाचार से उन्हें दो चार होना पड़ा |
उन्होंने बताया जब वे आवेदन करने गए तो उनसे कहा गया के दो साल में पूरा
वेतन मिलेगा इसलिए कुछ चढ़ौती चढ़ाएं | उन्होंने रिश्वत मागने की शिकायत
आलाह अफसरों से की | दो साल तक व्यवस्था से जूझते रहे | बिना कुछ लिए
बच्चों को पढ़ाते   रहे |जब वह किसी प्रकार की भ्रष्टाचारियों को शिकस्त
नहीं दे पाए तो उन्होंनेवर्ष १९९७ में प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र
लिखकर सम्मान में मिली धन राशि का ड्राफ्ट बनबाया , साल ,प्रसस्तीपत्र
मूल रूप में रजिस्टर्ड डांक से बापस कर दिया |
उनका हहना था कि जब हमें उस सम्मान के साथ मिले मदद स्वरूप दो
साल का सेवा विस्तार के लिए विभाग को पैसे देने पड़े तो फिर उस सम्मान का
ओचित्य शेष नहीं बचता | उत्तर प्रदेश की व्यवस्था का कमाल देखिये कि शाल
, पांच हजार रूपया का ड्राफ्ट व मूल प्रशस्ति पत्र सब जहाँ भेजा गया वहां
से एक साधारण जाँच भी नहीं आयी कि आखिर एक साधारण शिक्षक क्यों वापस कर
रहा है लेकिन श्री चोहान को बड़ा ही आत्मसंतोष हुआ | श्री चोहान बताते
हैं कि भ्रष्ट तंत्र से उनकी लढाई जारी है |

Saturday, August 13, 2011

चूहे छोडते है सबसे पहले डूबता जहाज


एक प्रचलि‍त कहावत है कि‍ जब कोई जहाज डूबने वाला होता है तो सबसे पहले चूहों को पता होता है और वो जहाज को छोडकर भाग जाते हैं। ऐसा ही वाक्याु जनपद इटावा में आज रंक्षाबंधन के पर्व पर को देखने को मि‍ला जब बसपा वि‍धायक शि‍व प्रसाद यादव ने राजनी‍ति‍ से संन्याास लेकर बर्षो पुरानी इस कहावत को चरि‍तार्थ कि‍या। बसपा सरकार के वि‍गत चार वर्षों के कार्यकाल में हत्यान, लूट, बलात्का र से जुडी घटनाओं में बसपा वि‍धायकों की संलि‍प्त ता जि‍स तरह सामने आती रहीं लगता अब बसपा वि‍धायक आत्मरग्लाेनि‍ से भर चुके हैं। प्रदेश के वि‍धायक इस कदर आत्मरग्ला नि‍ से भर गये कि‍ उन्हेंन राजनीति‍ से सन्याशस लेना ही अपनी कर्मों की सजा के रूप में देखा या फि‍र अगले वि‍धान सभा चुनाव में जनता से वोट मांगने की ये वि‍धायक हि‍म्म त नहीं रखते।
एक प्रचलि‍त कहावत है कि‍ जब कोई जहाज डूबने वाला होता है तो सबसे पहले चूहों को पता होता है और वो जहाज को छोडकर भाग जाते हैं। ऐसा ही वाक्याु जनपद इटावा में आज रंक्षाबंधन के पर्व पर को देखने को मि‍ला जब बसपा वि‍धायक शि‍व प्रसाद यादव ने राजनी‍ति‍ से संन्याास लेकर बर्षो पुरानी इस कहावत को चरि‍तार्थ कि‍या। बसपा सरकार के वि‍गत चार वर्षों के कार्यकाल में हत्यान, लूट, बलात्का र से जुडी घटनाओं में बसपा वि‍धायकों की संलि‍प्त ता जि‍स तरह सामने आती रहीं लगता अब बसपा वि‍धायक आत्मरग्लाेनि‍ से भर चुके हैं। प्रदेश के वि‍धायक इस कदर आत्मरग्ला नि‍ से भर गये कि‍ उन्हेंन राजनीति‍ से सन्याशस लेना ही अपनी कर्मों की सजा के रूप में देखा या फि‍र अगले वि‍धान सभा चुनाव में जनता से वोट मांगने की ये वि‍धायक हि‍म्म त नहीं रखते।
 

  इटावा 13 जुलाई - इटावा जिले की भरथना विधानसभा से  ब स प  एम् एल ए शिव  प्रसाद यादव ने आज राजनीति से संन्यास ले लिया | श्री यादव भरथना सीट रिजर्व हो जाने के कारण  इस बार  विधूना  से  प्रत्यासी थे | आज उन्होंने मिडिया को एक पत्र जारी कर ये बात बताई कि वे राजनीति से संन्यास लेलिये हैं | उन्होंने अपने पत्र में साफ़ लिखा है कि राजनैतिक  स्थितियां अनुकूल होने के कारण वे राजनीति से संन्यास ले रहे हैं | उन्होंने बसपा सुप्रीमो  मायावती की पार्टी से स्तीफा नहीं दिया है | श्री यादव ने अपने राजनैतिक जीवन में की पार्टियाँ भी बदलीं थी और वे सपा के राजनैतिक  धुर विरोधी माने जाते थे उन्होंने पिछले विधानसभा चुनाव में भरथना सीट से सपा मुखिया मुलायम सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ा था और वे १० हजार से भी कम मतों से हरे थे | मुलायम के स्थीफा देने के बाद वे यहाँ से विधायक हुए थे | 

Monday, August 8, 2011

जयपुर से सैफई के चोरों ने ए टी एम् मशीन चुराई

 
 
 
इटावा ८ जुलाई -यूँ तो पूरा देश सैफई को सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के नाम से जानता है और अब सैफई की एक नई पहचान समाज के सामने आना शुरू हो गयी है |  इसका कारण अगर    प्रबुद्ध लोगों की मानें तो दो हैं एक तो चुनावों में बूथ और मतपेटियां लूटने की आदत है |  मायावती की सत्ता को बताते हैं और उनका  कहना साफ़ है कि पाँच साल सत्ता से दूरी इन घटनाओं का मूल कारण है क्योकि सपा जब सत्ता में होती है तब ये जनता और अफसरों को लूटते हैं और अब ए टी एम् मशीन ही उठा लाये |  चोरों की एक नई किस्म येसी भी है जो सिर्फ सैफई में  ही पाई गयी है |  पता नहीं   कैसे?कैसे शाति‍र चोर पड़े हुये हैं जि‍नका कोई जबाव नहीं है। अभी तक तो ये एटीएम मशीनों को ही लूटते आये हैं। यह शायद अपनी तरह का पहला और अनूठा मामला है कि‍ चोर पूरी एटीएम मशीन को ही उखाड़ कर करीब चार सौ कि‍लोमीटर दूर जयपुर (राजस्थान) से सैफई ले आये। जानकारी के अनुसार गत 31 जुलाई की मध्यरात्रि राजस्थान की राजधानी जयपुर के मानसरोवर कोतवाली क्षेत्र से लूटे गयी आईसीआईसी बैक की एटीएम मशीन को आज पूरे एक सप्ताह के बाद सैफई हवाई पटटी के पास नहर से जयपुर से आई पुलिस ने गिरोह सरगना की निशानदेही पर बरामद कर लेने में सफलता तो जरूर प्राप्त कर ली लेकि‍न मशीन में मौजूद रही करीब दस लाख रूपये से ज्यादा रूपये वह फि‍र भी बरामद नही कर सकी, इस एटीएम मशीन मे घटना के समय 10.38 लाख रूपये रखे हुये थे। फलस्‍वरूप जयपुर पुलि‍स को खाली एटीएम लेकर ही लौटना पड़ा। राजस्थान मे पहली बार हुई एटीएम लूट की घटना ने जयपुर पुलिस प्रशासन की नीद हराम कर दी थी। जयपुर पुलिस टीम आज तड़के यहां पहुंची और स्थानीय पुलिस के साथ यादव नगर निवासी सुवोध यादव पुत्र इंदल सिंह ,सर्वेश कुमार पुत्र मोहर सिंह निवासी भावलपुर के साथ हरदोई जिले के रहने वाले संदिग्धो की घेराबंन्दी करके उन्हें हिरासत मे लिया फि‍र गिरोह के दो अन्य सरगनाओ की निशानदेही पर पुलिस बल सैफई हवाई पटटी नि‍कट रूकुईया नहर पुल पहुंचा जहॉ कड़ी मशक्कत के बाद टीम को एटीएम मशीन पानी में पड़ी मिली, जिसे लेकर पुलिस टीम थाने पहुंची और फि‍र एटीएम मशीन व दो स्थानीय लोगो को साथ लेकर जयपुर के लि‍ए रवाना हो जि‍नसे पूछताक्ष की जायेगी। 
नीरज महेरे  

Sunday, July 31, 2011

अपमान से मिली क्रांति : अमर सिंह


 
इटावा-३१ जुलाई - कभी सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव के वि‍श्वा‍सपात्र रहे राष्ट्रीय लोकमंच के अध्य‍क्ष/सांसद अमर सिंह आज पहली बार बगैर मुलायम सिंह के उनके गृह जनपद इटावा में आये। मौका था नवगठि‍त लोकमंच द्वारा पण्डाल सभागार में सत्ता परि‍वर्तन रैली का। हर बार की तरह उनके साथ बॉलीबुड स्टार/सांसद जयप्रदा भी आई। रैली के दौरान अमर सिंह ने कहा कि‍ उन्हें अपमान से जो क्रांति‍ मि‍ली है उससे वह खरे सोने की भांति तप कर लोगों के बीच पहुंच रहे है। इटावा में आयोजि‍त रैली के दौरान मुलायम सिंह, रामगोपाल, शि‍वपाल सिंह और अखि‍लेश के साथ‍-साथ हर वर्ष सैंफई में आयोजि‍त होने वाले कार्यक्रमों पर भी अमर सिंह ने जमकर प्रहार कि‍या। अमर सिंह ने कहा कि‍ सपा और मुलायम के साथ बि‍ताये 14 वर्षों के एक-एक पल उन्हें याद हैं। क्या जानते थे कि‍ वह जि‍स व्यक्ति या जि‍स पार्टी के लि‍ए इतना सब कुछ कर रहे है। मतलब नि‍कलते ही इस तरह मुंह फेर लेंगे। अपनी पीडा व्यक्त करते हुए अमर सिंह ने कहा कि‍ उनके खि‍लाफ तो षडयंत्र उसी बक्त‍ से शुरू हो गया था जब वह अपना इलाज कराने सि‍गांपुर गये हुए थे। दोनों गुर्दे खराब होने के बाबजूद फि‍रोजाबाद लोकसभा चुनाव में मुलायम सिंह की पुत्र बधू के चुनाव प्रचार के लि‍ए मुंह पर पट्टी बांधकर पांच सभायें भी की। रामगोपाल ने उनके बारे में कहा था कि‍ अमर सिंह की कोई जरूरत नहीं है। इस पर सपा प्रवक्ता मोहन सिंह ने भी उन्हें बेशर्म कहकर राय दी कि‍ वह इस्तीफा क्यों नहीं दे देते। जब मुलायम सिंह से कहा तो उनका कहना था जयाप्रदा ने राहुल गांधी की तारीफ क्यों की। साथ ही कहा कि‍ वह दो बार मुख्यमंत्री बने बगैर उनकी मदद के। साथ ही मुलायम ने यह राय भी दी कि‍ अलग पार्टी बनालो मेरा आशीर्वाद तुम्हारें साथ है। कहा कि‍ रामगोपाल की गालि‍यां सुनने के बाबजूद सैंफई मोहत्सव का आतिथ्‍य स्वीकार कि‍या। अमर सिंह ने कल्याण सिंह के सपा में आने पर अपने ऊपर लगे दोषारोपण के बारे में कहा कि‍ यदि‍ मुलामय सिंह कल्याण का कलंक उनसे अपने ऊपर लेने के लि‍ए कहते तो वे हस कर ले लेते। लेकि‍न मुलायम ने उन्हें जनेश्वर मि‍श्र के नेतृत्व में उन्हें पार्टी से नि‍काल दि‍या गया। वह कहा करते थे कि‍ वह मुलायम वादी है और बचनबद्ध है और कभी छोड़कर नहीं जायेंगे। लगता है इसे ही उनकी कमजोरी समझ ली गई। परि‍वार और सखा के चुनाव के बीच मुलायम ने परि‍वार को ही चुना। मुलायम के बारे में अमर सिंह का कहना था कि‍ वह कुछ क्षण में रूष्ट हो जाते है और कुछ क्षण भ्रष्‍ट हो जाते है। सत्ता मि‍लने पर यहीं मुलायम सोनि‍यां जि‍न्दावाद के नारे लगाते है नहीं मि‍लने पर ..............। अमर सिंह ने कहा कि जब भी कांग्रेस या मायावती के खि‍लाफ बोलने की बात आती थी तो उन्हें ही आगे कर दि‍या जाता था। कहा कि‍ साढे़ चार फुट के मुलायम सिंह को कभी भी नाटेपन का एहसास नहीं होने दि‍या और 14 वर्ष तक अपने कन्धों पर लि‍ये घूमते रहे फि‍र भी कूड़ा-करकट ही कहा गया। साथ ही कहा कि‍ मुलायम सिंह को मीडि‍या में जगह अमर सिंह की बजह से ही मि‍लती रही है और मि‍लती रहेगी। आज भी मुलायम सिंह उनका ही नाम लेकर छपते आ रहे है। भले ही बुराई करके ही। रैली को सांसद जयाप्रदा और लोकमंच के कार्यकारी अध्यक्ष औबेदुल्ला. आजमी ने भी सम्बोधि‍त कि‍या लेकि‍न अपना सारा गुस्सा कहें या भाषण मोहम्मद आजम खां पर ही उतारा। रैली के दौरान पार्टी महासचि‍व/उत्तर प्रदेश प्रभारी अरवि‍न्द सिंह भी मौजूद रहे। 
नीरज महेरे  

Wednesday, June 15, 2011

रेगि‍स्तामनी जहाजों से खाली होता चम्बल क्षेत्र

  
 
 
 
इटावा 15 जून /  रेगि‍स्तान के जहाज कहें जाने वाले ऊंट की संख्या भले ही जि‍ला इटावा में कम देखी जा रही हो लेकि‍न ऊंट पट्टी का क्षेत्र कहें जाने वाले चकरनगर में इन्हें पालने वाले शौंकोनी को संख्या कम नहीं है और वह उनसे काम ही नहीं लेते इनकी सवारी भी करते है। गौरतलब है कि‍ यमुना, चम्बल, क्वारी, सिंध व पहूज नदि‍यों के बीच बसे चकरनगर क्षेत्र में वर्तमान में रेगि‍स्तान का जहाज कहें जाने वाले ऊंटों की संख्यां 115 ही रह गई है। यह संख्या कि‍तनी तेजी से घटी है इसका पता इससे ही लगता है कि‍ 10 वर्ष पूर्व 2001 में ऊंटों की संख्या। जहां 21 हजार के आस-पास थी। बात अगर इससे भी दस वर्ष पूर्व की करें तो वह संख्या 23 हजार से ऊपर थी। 2001 के बाद से जि‍स तरह से ऊंटों की संख्यां घटी है वह अपने आप में चौकाने वाली है। चकरनगर क्षेत्र में पूर्व में ऊंटों को पालने का प्रचलन इस लिए  भी ज्यादा था कि‍ क्षेत्र में याता-यात का कोई साधन नहीं था तब ग्रामीण ऊंट की पीठ पर पलान लगाकर बजन ढुलाई का काम करते थे जि‍ससे ऊंट पालको को अच्छा धनार्ज पार्जन होता था और तब एक-एक ऊंट पालक के पास करीब तीन-तीन दर्जन ऊंट हुआ करते थे लेकि‍न बदलते दौर के चलते इस व्यवसाय व पालन में बेतहासा आई गि‍रावट के भी कई कारण सामने आये है। इस बारे में ऊंट पालक एवं तेजपुरा नि‍वासी गजाधर सि‍ह चौहान ने बताया कि‍ इनका पैर गद्दी दार होता है जि‍समें कांटा चुभने का खतरा हमेशा बना ही रहता है। ऐसे में जोली फ्लोरा की अधि‍कता ने ऊंट पालकों को चि‍न्तित कर दि‍या है। कहा कि‍ जोली फ्लोरा जि‍से बि‍लायती बबूल कहते है का कांटा जि‍स जगज लग जाता है वहां पर जरा सी भी असाबधानी तथा चलने पर उस स्थान पर गलाव की स्थिति‍ पैदा हो जाती है यही बजह है कि‍ ऊंट पालने या इनसे व्यवसाय करने से लोग अब कि‍नारा करने लगे है। एक अन्य ऊंट पालक राजेन्द्र प्रसाद ति‍वारी का कहना है कि‍ उन्हें ऊंट पालने का शौक बचपन से ही है और आज भी काफी मौज-मंस्ती आती है। बताया कि‍ जब वह ऊंट पर पलान रखकर इसकी सवारी करते थे और व्यवसाय भी करते थे तब इस क्षेत्र में ऊंटों की बहुतायत होने का एक कारण यह भी था कि‍ ऊंटों को अपना पसंदीदा चारा बड़ी आसानी से मि‍ल जाता था। आमतौर पर कठबेरी, झरबेरी के पौधे बहुतायत पाये जाते थे। ऊंटों का एक चारा जबासा भी है जो नदि‍यों के कि‍नारे तराई वाले इलाके में पाया जाता है। इसकी शाखाओं की खास वि‍शेषता ये होती है जैसे-जैसे लपट तेज होती है जबासा उतना ही हरा-भरा दि‍खाई पड़ता है। वर्षा होने पर इसी जबासा की शाखायें उसी तरह सूख जाती है जैसे पाला पड़ने पर आलू आदि‍ सूख जाता है। 75 वर्षीय एवं टेहनपुर (मध्य प्रदेश) नि‍वासी वीरेन्द्र सि‍ह राजावत का कहना है कि‍ ऊंट पालने का शौंक उन्हें भी बचपन से ही और वह एक साथ कई ऊंटों को पाल कर अपना शौंक पूरा कर चुके है। उनका  कहना है  कि‍ इस मंहगाई के दौर में ऊंट रख पाना कि‍सी चुनौती से कम और मुश्किल भरा है। उन्‍होंने अन्य समस्‍याओं का जि‍क्र करते हुए कहा कि‍ जोली फ्लोरा (बि‍लायती बबूल) की बहुताय ने इस शौक पर अपना बुरा असर इस तरह डाला कि‍ ऊंट बीमार पड़ जाते है तो उनका कोई इलाज भी सम्भ‍व नहीं होता। डाक्टर भी इलाज के मामले में हाथ खड़े कर लेते है। बीमार ऊंट का इलाज मुख्यत: उसे दागना होता है और अब दगेरों की भी कमी हो गई तो वहीं नई पीड़ी इस वि‍शालकाय भारी भरकम शरीर वाले ऊंट को पालने के लि‍ए तैयार नहीं है। शायद यहीं वजह है कि‍ हजारों ऊंटों वाली इस भूमि‍ पर अब ऊंटों की संख्या सैंकड़ों से भी कम रह गई है। इस बारे में चकरनगर क्षेत्र के प्रताप पुरा, बल्लों की गढि‍या एव कुंदोल गांव में रहने वाले ऊंट पालने के शौकीनों ने बताया कि‍ अब ऊंट पालना उनके लि‍ए घाटे का सौदा हो रहा है और ऐसी स्थिति‍ में कोई भी उनके ऊपर रूपये लगाना नहीं चाहता है। इन सभी का कहना ये भी है कि‍ बि‍डम्ब‍ना तो इस बात की है कि‍ ऊंट का कोई अंग्रेजी इलाज नहीं है ऐसी स्थिति‍ में जब ऊंट बीमार पड जाते है तो उन्हें क्षेत्र के प्रसि‍द्ध चि‍कि‍त्सक जो वर्तमान में काफी बुर्जग हो चले है साथ ही जि‍ला मुख्यालय इटावा पर रहने से उन्हें गांव तक लाने में काफी दि‍क्कतों का सामना करना पडता है। बढ़ती उम्र के चलते उनसे भी अब कोई उम्मीद नहीं की जा सकती  |

Monday, June 6, 2011

जितना मजबूत संगठन उतनी मजबूत पुलिस : सुवोध

  पुलिस एसोसिएशन एक सामाजिक पुलिस कल्याणकारी संगठन है और जिसको मजबूत करने के लिए हर पुलिस कर्मी की जिम्मेदारी  है क्योंकि इसके माध्यम से ही हम पुलिस कर्मी  एक दुसरे की मदद कर सकते हैं | यह जानकारी आज इटावा में उत्तर प्रदेश पुलिस  एसोसिएशन के उपाध्यक्ष सुवोध यादव ने देते हुए कहा हम लोग इस संगठन के माध्यम से प्रदेश  पुलिस के आल्हा अफसरों को अपनी समस्याओं से अवगत करा सकते हैं |
   पुलिस  एसोसिएशन के उपाध्यक्ष ने  सभी चार लाख अराजपत्रित पुलिस जनों को संगठन की जानकारी देते हुए कहा कि जितना अपना संगठन मजबूत होगा उतना ही हर पुलिस कर्मी मजबूत होगा और हम लोग इसी संगठन के माध्यम से अपने  साथियों की व उनके परिजनों की विपत्ति में मदद हो सकेगी | उन्होंने कहा कि  हम लोग  प्रदेश भर में जा-जा कर  अपने संगठन  के प्रति लोगों को  जागरूक बनाने का  काम कर रहे हैं लेकिन हमारी ही  कुछ पुलिस की गुप्तचर  एजेंसियां  शासन को झूंठी  , भ्रामक और  मनगढ़ंत खबरें कुछ आई पी एस अफसरों के इशारे पर भेज रहे हैं जिससे शासन हम लोगों के प्रति उदासीन  है | 
       उन्होंने बताया अभी हाल में वे प्रदेश के बरेली जिले में भी गए थे जिसकी भी गलत और भ्रामक , रिपोर्ट पुलिस की गुप्तचर  एजेंसी ने शासन को भेजी है | उन्होंने बताया अभी एक दिन पूर्व में  बरेली गया था |  इस दौरान हमने किसी कालेज या किसी संस्थान में कोई मीटिंग नहीं की थी  बल्कि  हमने कई पूर्व परिचित पुलिस  कर्मियों को सिटी स्टेशन बरेली मणिनाथ पर उन साथियों को संगठन की जानकारी दी थी | उन्होंने बताया कि बरेली में जो हुआ वो कोई नई बात नहीं है येसी झूंठी और भ्रामक खबरें प्रदेश के कई जिलों में पहले भी हो चुकीं हैं |  उन्होंने अपने चार लाख पुलिस कर्मियों से यह भी कहा है कि संगठन से संबंधित किसी प्रकार की  जानकारी के लिए हमारे  साथी  मेरे  मोवाइल ९४५७४४११८८ पर कर सकते हैं |

Saturday, June 4, 2011

90 लावारि‍स शवों को है अपनी शि‍नाख्त का इंतजार

 
 
इटावा- जनपद में वि‍भि‍न्न पुलि‍स थाना क्षेत्रों के अंतर्गत घटि‍त होने वाली दुर्घटनाओं में अनेक ऐसे लोग दुर्घटनाग्रस्‍त होकर अकाल मृत्यु के शि‍कार हुए है जि‍नकी शि‍नाख्त करने वाला कोई नहीं होता और ऐसे बदनसीब मृतकों के शवों को पुलि‍स लावारि‍स मान कर मुर्दाघ‍र पहुंचा देती है और ऐसे लोगों के कपड़े लत्ते व अन्य सामान काफी समय तक थाना पुलि‍स रखे भी रहती है लेकि‍न फि‍र भी कोई इन्हें पहचानने नहीं आता। वर्ष 2010 में जनवरी से लेकर अब तक मई 2011 तक का पुलि‍स रि‍कार्ड बताता है कि‍ कुल 220 लोग ट्रेन हादसे के शि‍कार हुए जि‍ससे 90 लावारि‍स लाशों की पहचान का संकट आज तक बरकरार है। अज्ञात रूप से मरने वालों में सार्वधि‍क वह लोग होते है जो ट्रेन में सफर के दौरान हादसे के शि‍कार होते है इनमें ऐसे भी होते है कुछ लोग आत्महत्या ट्रेन से कटकर कर लेते है तो कुछ सावधानीवश रेलवे ट्रेक पार करते समय मौत का शि‍कार हो जाते है वहीं कुछ लोग रेलगाड़ी की यात्रा करते समय कि‍सी न कि‍सी कारण गि‍रकर मर जाते है। यह आश्‍चर्यजनि‍क रहस्य आज तक बना हुआ है। कि‍ जनपद में इटावा  थाने का  रेलवे ट्रेक लगभग एक सौ कि‍लोमीटर के दायरे में रेलवे ट्रेक पर इस तरह की घटनाये लगभग रोजाना हो रही है। वर्ष 2011 जनवरी से लेकर दि‍सम्बर से मई तक 190 लोगों की मृत्यु हुई जि‍नमें 60 लोगों की शि‍नाख्त आज तक नहीं हो सकी इसी तरह वर्ष 2011 में जनवरी से लेकर अप्रैल माह तक 5 लोग ट्रेन की चपेट में आने से मरे जि‍नमें से कुल 20 लोगों की पहचान का संकट आज भी बरकरार है ये अज्ञात शव अपनी पहचान के लि‍ए मोहताज बने रहे और कि‍सी ने इनकी शि‍नाख्त नहीं की। क्या यह मान लि‍या जाए कि‍ इतने लोगों का इस दुनि‍या में कोई नहीं था। पुलि‍स की माने तो वह बराबर मृतक की शि‍नाख्त करने की प्रयास करती है। इस बारे में इटावा के जी आर पी  थानाध्यक्ष  अनिल कुमार  श्रीवास्तव बताते है कि‍ आज्ञात शवों के साथ समाचार पत्रों में भी प्रकाशन कराया जाता है। बावजूद इसके इन अभागे शवों की शि‍नाख्त नहीं हो पाती। घटना के समय शव के पास से मि‍ले सामान को पहचान के लि‍ए सुरक्षि‍त रखा जाता है ताकि‍ भवि‍ष्य में मृतक का कोई सम्बन्धी आकर पहचान कर सके। पुलि‍स के अनुसार लावारि‍स लाशों से सार्वधिक पूर्वांचल  के लोग पृतीत होते है ये लोग जनरल कोचों में सवार होते है। सामान्य डि‍ब्बों में भी भीड़ अधि‍क होने पर लोग ट्रेन में लटककर या कि‍नारे डि‍ब्बों के दरवाजे पर बैठ कर यात्रा करते है। जो कि‍सी प्रकार धक्के या नींद आने पर ट्रेन से गि‍रकर दुर्घटनाग्रस्त हो जाते है। इटावा जीआरपी थानाध्य‍क्ष बताते है कि‍ दुर्घटना के बाद जब तक पुलि‍स घटनास्थल पर पहुंचती है तब तक स्थानीय लोग मृतक का मोबाइल पर्स व अन्य सामान लूटकर चले जाते हैं इस कारण इनकी   पहचान के लि‍ए संकट खड़ा कर देते है। ऐसे में शव की पहचान के लि‍ए पुलि‍स का सि‍रदर्द और बढ़ जाता है। इसके अलावा एक बि‍डम्बना यह भी है कि‍ रेलवे एवं सि‍वि‍ल पुलि‍स दोनों ही केवल ट्रेक पर पर पड़ें शवों को उठाने तक ही सीमि‍त है। कई बार सीमा वि‍वाद में शव घंटों दुर्घटना स्थल पर पड़े रहते है। ऐसे में अनेक ट्रेने शव पर गुजरकर उसे क्षति‍ग्रस्त बना देती है तब तक शव इतने क्षति‍ग्रस्त हो जाते है कि‍ पुलि‍स द्वारा इन शवों के लोथड़ों को समेटना एक समस्या बन जाता है।
 neeraj mahere
nai duniya