Thursday, August 9, 2012

माफियाओं के संरक्षण में सपा महासचिव ने किया एक्स-प्रेस वे का उद्घाटन
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समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव ने आज ग्रेटर नॉएडा में यमुना एक्स-प्रेस वे के शुभारम्भ करते हुए अथोरिटी के अधिकारीयों से मांग की के इस पर गाड़ियों के चलने की रफ़्तार १०० किलोमीटर प्रति घंटे के बजे १२० की जाये | उन्होंने यह भी कहा के इसे लखनऊ तक बनाया जायेगा | इस अवसर पर जहाँ प्रवीन कुमार एस एस पी नॉएडा जैसे इमानदार अफसर तो थे ही साथ ही गुड्डू पंडित जैसे माफिया भी सपा महासचिव के साथ खड़े नजर आये |
नीरज महेरे (पत्रकार)
०९९१०४३८८०३

Wednesday, April 11, 2012

सरकार के मालिक के ही घर में तानाशाही


इटावा : इटावा कहने को सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का गृह जनपद है, लेकिन यहाँ मायावती के शासन काल से ही पुलिस की गुंडई कायम है, जो अब भी बदस्‍तूर जारी है. हद तो तब हो गयी जब इटावा में मायावती सरकार से तैनात  एसएसपी ने समाजवादी पार्टी की आँखों का तारा बनने के लिए दो पढ़ने वाले युवकों को अपराधी बना डाला. हत्या, लूट, बलात्कार, जुआ, सट्टा, मादक पदार्थों की बिक्री समेत तमाम आपराधिक कृत्‍य जिले में खुले आम हो रहा है, उन पर रोक नहीं लग पा रही है और नए अपराधी बनाने की तैयारी की जा रही है |.
एसएसपी ऐसे सब इंस्‍पेक्‍टरों को थाना इंचार्ज बना रहे हैं, जिनको ठीक से चौकी चलाने का भी शऊर नहीं है. अपराधियों पर अंकुश लगाने में नाकाम एसएसपी अब मायावती के खास बनने के बाद अब सपा के नजदीक जाने को ब्‍याकुल हैं. इसी क्रम में इन्‍होंने चक्रव्‍यूह रच कर दो पढ़ने वाले छात्रों को बेवजह अपराधी बना डाला. ''गुनहगारों में शामिल हूं, गुनाहों से नहीं वाकिफ, सच जानते हैं हम, खता क्‍या है खुदा जाने'' कुछ इसी तरह का हाल जिले के एसएसपी राजेश मोदक डी राव का है. बसपा शासन काल में बसपाइयों के खास हुआ करते थे. अब प्रदेश में सत्‍ता परिवर्तित हुई तो सपाई बनने का नशा चढ़ गया है. इसी कोशिश में एसएसपी ने मोहम्‍मद हाशिम और मनोज कुमार नाम के दो छात्रों को इस आरोप में पकड़ा कि वह शस्‍त्र लाइसेंस बनवाने के लिए सैफई ब्‍लॉक प्रमुख तेज प्रताप सिंह का नाम लेकर दबाव बना रहे थे, तेज प्रताप सिंह सपा मुखिया के पौत्र हैं.
प्रेस को बुलाकर पूरे मामले का एसएसपी ने खुलासा किया लेकिन जब एक पत्रकार ने एसएसपी से सवाल किया कि आप प्रेस के लोगों का फोन नहीं उठाते तो एक अपराधी का फोन कैसे उठा लिया, इस सवाल पर एसएसपी को सांप सूंघ गया. उनकी हंसी बता रही थी कि पूरा मामला झूठ का पुलिंदा है. यह पूरा षड्यंत्र चंद पत्रकार और एसएसपी के दिमाग की उपज था, समाजवादी पार्टी का खास बनने के लिए. प्रेस कांफ्रेंस के दौरान एसएसपी एक पार्टी नेता की तरह खुलासा कर रहे थे कि जबकि नवरात्र के दिन पुलिस की गोली से तीन देवी भक्‍त मारे गए, दो दिन पूर्व एक सपा कार्यकर्ता की हत्‍या हो चुकी है. पर किसी भी मामले का पुलिस खुलासा नहीं कर सकी है, किसी की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है. पूरे जनपद में अपराध चरम पर है.
मुख्‍यमंत्री का गृह जनपद अपराधियों का अड्डा बना हुआ है. एसएसपी सपा के खास बनने के लिए जिस सब इंस्‍पेक्‍टर के नाम के आगे यादव लिखा गया है उसको थानेदार बना रहे हैं, सीनियर दारोगा हाशिए पर ढकेल दिए गए हैं. इटावा शहर का सबसे महत्‍वपूर्ण थाना, जहां सपा के मुखिया मुलायम सिंह यादव तथा वरिष्‍ठ नेता रामगोपाल यादव का आवास है, उस थाने का इंचार्ज ऐसे सब इंस्‍पेक्‍टर को बना दिया, जिसे ठीक से वर्दी पहनने का भी शऊर नहीं है. जब सीएम के जनपद का यह हाल है तो पूरे प्रदेश के हालत का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है. पुलिस ने जिन दो छात्रों को पकड़ा है उनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है. मनोज कुमार हेवरा डिग्री कालेज का छात्र है जबकि हाशिम मध्‍य प्रदेश के भि़ड जनपद में पढ़ता है. दोनों ही जसवंतनगर के लुधपुरा गांव के रहने वाले हैं.
एसएसपी का कहना है कि पहले भी ये लोग मंत्री जी का नाम लेकर शस्‍त्र लाइसेंस बनवाते थे. एसएसपी यह भी भूल गए कि पहले बसपा की सरकार थी तो मंत्री जी यानी शिवपाल यादव का ना क्‍यों लेंगे ये छात्र. अभी तो मंत्रिमंडल के गठन को अभी एक माह भी नहीं हुआ है. माया के मायावी अधिकारी जब तक मुख्‍यमंत्री के जनपद में तैनात हैं तब तक अपराध और अपराधियों पर अंकुश नहीं लगाया जा सकता, क्‍योंकि ये पुलिस अधिकारी अपनी पूरी ऊर्जा समाजवादी पार्टी के आंखों का तारा बनने में ही लगा रहे हैं. किसी पत्रकार ने भी यह जानने का प्रयास नहीं किया कि मामले में कितनी सच्‍चाई है, जो एसएसपी ने कहा वही पत्‍थर की लकीर मानकर छाप दिया, क्‍योंकि पांच वर्ष तक ये पत्रकार भी बसपाइयों की रोटी के टुकड़ों पर पलते रहे, अब समाजवादी पार्टी की नजरों में छाने के लिए कुछ भी लिख सकते हैं.
जब इन पत्रकारों का कोई अपना पुलिस के जाल में फंसला है तो लिखते हैं कि पुलिस की गुंडई चल रही है. परन्‍तु इस मामले में यह जानने की जरूरत भी नहीं समझी कि इन छात्रों का कोई आपराधिक इतिहास है कि नहीं, ये दोषी हैं या नहीं. एसएसपी की प्रेस वार्ता सुनकर कोई आम आदमी भी बता देगा कि सच्‍चाई क्‍या है. प्रेस कवर कर रहे पत्रकार एसएसपी के बयान को गीता का उपदेश मानकर ग्रहण कर रहे थे. पर इस बारे में जरा भी ध्‍यान नहीं दिया कि अगर ये दोनों छात्र गलत फंसाए गए तो ये भविष्‍य में बड़े अपराधी भी बन सकते हैं.|

Monday, January 16, 2012

क्या यही है मुलायम का समाजवाद


उत्तर प्रदेश में बसपा के बाद सत्ता की सबसे बड़ी दावेदार समाजवादी पार्टी को माना जा रहा है। सपा और खासकर 73 वर्षीय मुलायम सिंह के लिए यह विधान सभा और 2014 में होने वाले आम चुनाव उम्र के हिसाब से काफी मायने रखते हैं। कुछ राजनैतिक पंडित तो यहां तक भविष्यवाणी कर रहें हैं कि उक्त चुनाव मुलायम के नेतृत्व में लड़े जाने वाले आखिरी चुनाव हो सकते हैं। इसके बाद सपा को कोई न कोई नया कर्णधार चाहिए ही होगा। यह नया कर्णधार कौन होगा, यह प्रश्न भविष्य के गर्भ में छिपा है। लेकिन उम्मीद यही जताई जा रही है कि मुलायम अपने बाद भी सपा की बागडोर अपने परिवार में ही रखना चाहेंगे।

   प्रतीक 2014 के आम चुनाव (लोकसभा) में समाजवादी पार्टी की ओर से साइकिल  की सवारी कर सकते हैं। उन्हें मुलायम अपने वर्चस्व वाली किसी संसदीय सीट से अपना प्रत्याशी बना सकते हैं। यह सीट संभल, बदायूं या बेहद उम्मीद है कि इटावा की भी हो सकती है। परिवार को छोड़कर करीब-करीब सभी पुराने समाजवादी उनसे किनारा करके चले गए हैं। राज बब्बर, अमर सिंह, बेनी प्रसाद वर्मा, रशीद मसूद काफी लम्बी लिस्ट है। मोहन सिंह को भी डीपी यादव प्रकरण के बाद किनारे कर दिया गया है। अब पार्टी में नेताओं के नाम पर आजम खां को छोड़कर परिवार वाले ही बचे हैं।
    उम्र के साथ मुलायम की हनक और धमक भी कम हो गई है। अब नेता जी पर दबाव डालकर उनका निर्णय बदलवा लिया जाता है। सपा प्रमुख को करीब से जानने वालो का कहना है कि नेताजी बात के धनी हुआ करते थे, उनकी बात पत्थर की लकीर होती थी, इसकी वजह से उन्हें कई बार नुकसान भी उठाना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी इसकी चिंता नहीं की। यह बात अब नेताजी में नहीं रही। इसी का फायदा उनका परिवार उठा रहा है। मुलायम को कुछ फैसले परिवार के दबाव में लेने पड़ रहे हैं तो कई फैसले पारिवारिक दवाब में बदलने पड़ रहे हैं। पत्नी साधना सिंह की चचेरी बहन मधु गुप्ता को मुलायम लखनऊ का मेयर बनाने और सांसद बनाने की कोशिश भी कर चुके हैं।

   मुलायम चौतरफा परेशानियों से घिर रहे हैं। कल्याण के कारण मुसलमान उनसे नाराज हैं तो छोटे भाई अमर सिंह की ‘बेवफाई’ के बाद पार्टी धन संकट से भी जूझ रही है। पैसे की कमी के कारण प्रचार-प्रसार का काम ठप पड़ा है। आर्थिक तंगी से जूझ रही समाजवादी पार्टी को अपने खर्चों में कटौती करनी पड़ रही है। बसपा के विज्ञापन प्रिंट से लेकर इलेक्ट्रानिक मीडिया तक में छाए हुए हैं, लेकिन सपा के पास विज्ञापन के लिए पैसा ही नहीं है। अमर के रहते सपा को कभी आर्थिक मोर्चे पर परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता था। आजम के चलते ही रामपुर की सांसद जया प्रदा भी मुलायम से दूर हो गई हैं। कन्नौज के छोटे सिंह यादव, गुन्नौर (बदायूं) उर्मिला यादव, विनोद उर्फ कक्का, जैसे दबंग नेता भी पार्टी से दूर चले गए हैं। यही नहीं अखिलेश और प्रतीक के आगे आने से शिवपाल यादव का राजनैतिक रूप से पीछे जाना भी कई प्रश्न चिन्ह खड़ा कर रहा है।

Saturday, September 3, 2011

देश की महापंचायत में भी जातिवाद : कमलेश

 दिल्ली ३ सितम्वर / नीरज महेरे / विशेष प्रतिनिधि एन सी आर अपडेट
बुलन्दशहर के सांसद को शिकायत है कि रेल मंत्रालय उनकी चिट्ठियों का जबाब देने की जहमत तो उठता है किन्तु न तो कार्यवाही की प्रगति से अवगत करता है और न ही जन समस्याओं के निवारण के लिए ठोस कार्यवाही ही करता है | लगातार रेल मंत्रालय की टाला - माटोली से सांसद कमलेश बाल्मीकि को यह पूरा भरोसा हो गया है कि वे दलित वर्ग में भी अंतिम पायदान से आते हैं इस कारण रेल मंत्रालय और रेल मंत्री उनकी बात को नहीं सुन रहे हैं |
   बुलन्दशहर के सांसद कमलेश बाल्मीकि विगत डेढ़ वर्ष से रेल मंत्री से मांग कर रहे हैं कि बुलन्दशहर - खुर्ज बाई पास पर रेलवे का अपर गामीं ( ओवर ब्रिज )  पुल  बनवाया  जाये जिससे आम जनता को रोजाना का जाम न झेलना पड़े और लोग समय से घर पहुंचें | इसके अलावावा उन्होंने दिल्ली से खुर्जा  आने वाली इ  एम् यू पैसेंजर को  बुलन्दशहर  तक बढ़ाने तथा बुलन्दशहर से दिल्ली वाया खुर्जा इ एम् यू चलवाने की मांग की थी |
   सांसद बाल्मीकि ने बताया कि इस मामले में रेल राज्य मंत्री ई० अहमद को २०  सितम्वर २०१० व १७ मार्च २०११ को भरत सिंह सोलंकी तथा १३ अप्रैल २०११ को के०एच० मुनियप्पा के आलावा रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष विवेक सहाय के कई पत्र मामले की जांच कराये जाने की बात लिखकर आते रहे हैं | किन्तु सांसद महोदय के पत्रों पर कार्यवाही न होने पर जब उन्होंने रेल मंत्री सुश्री ममता बनर्जी को स्वयं मिलकर पत्र देकर कार्यवाही की मांगें दोहराईं फिर भी जन समस्याओं के निराकरण के लिए कोई ठोस प्रयास रेल मंत्रालय अब तक नहीं कर सका है | जिससे सांसद कमलेश बाल्मीकि परेशां हैं और जनता यू०पी०ये० सरकार से बेहद नाराज है |
                

Saturday, August 27, 2011

सुबोध यादव हो सकते हैं बर्खास्त :यू.पी. सरकार

 
हाल के दिनों में उत्तर प्रदेश पुलिस वेलफेयर  एसोसिएशन  के नाम से गठित किये गये संगठन ने राज्य के आला पुलिस अफसरों की नाम मे दम कर दिया था। पुलिस के आला अफसरों ने इस संगठन के गठन से पहले ही इस संगठन से जुड़ने जा रहे पुलिस अफसरों पर अनुशासनहीनता के नाम से कार्रवाई करनी शुरू कर दी थी और जैसे ही चंद पुलिसजन संगठन के पदाधिकारी बने तो फिर बड़ी कार्रवाईयों की शुरुआत कर दी गई।
इस  उत्तर प्रदेश पुलिस वेलफेयर  एसोसिएशन के संस्थापक  सुबोध यादव को निलंबित तो पहले ही कर दिया गया था,  अब बर्खास्त करने की पूरी तैयारी कर ली गई है। सुबोध यादव को बर्खास्त करने से पहले नोटिस दे दिया गया,  जिस में सुबोध से नोटिस का जबाब मांगा गया है और जैसे ही नोटिस का जबाब दिया जायेगा,  वैसे ही सुबोध यादव को बर्खास्त कर दिया जायेगा।
सुबोध को दिये गये बर्खास्तगी नोटिस के अनुसार आरोपी आरक्षी 1545 सुबोध कुमार जो अनुभाग आगरा मे नियुक्त था, का स्थानान्तरण अपर पुलिस महानिदेशक रेलवे उप्र लखनऊ के आदेश संख्या पीआर-13-36/11(789) दिनांक 20-01-11 के आदेश के तहत गोरखपुर कर दिया गया,  लेकिन सुबोध ने वहां जाने की बजाय पुलिस संगठन के हितों में काम करना ज्यादा मुनासिब समझा और इसी परिप्रेक्ष्य में सुबोध के खिलाफ बर्खास्तगी की कारवाई तय मानी जा रही है।
इटावा में सुबोध यादव ने बर्खास्तगी नोटिस की प्रति को दिखलाते हुये कहा कि यह तो होना ही था। अधिकारी पहले से ही उसके खिलाफ बड़ी कार्रवाई का मन बनाये हुये थे और बर्खास्तगी से बड़ी कोई कार्रवाई क्या हो सकती है? सुबोध का कहना है कि मेरे पास सारे विकल्प खुले हुये हैं,  जैसे ही बर्खास्तगी की कार्यवाही की जायेगी सीधे अदालत के जरिये बहाली होकर सामने आऊंगा क्यों कि मेरे खिलाफ की जा रही कार्रवाई पूरी तरह से बदले की भावना से कार्रवाई की जा रही है,  इस कार्रवाई को पुलिस अमले का महाभ्रष्ट स्पेशल डीजीपी बृजलाल और रेलवे में एडीजे एके जैन के इशारे पर कार्रवाई को अमल में लाया जा रहा है।
इससे पहले सुबोध को तब निलंबित कर दिया गया था जब यूपी पुलिस ऐसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष नरेंद्र यादव का इटावा में उनका सर्मथकों की ओर से आगमन के दौरान जोशीला स्वागत कराया गया था। खुफिया रिर्पोटों के आधार पर सुबोध यादव को निलंबित कर दिया था। सुबोध यादव ने बताया कि साल 2011 के 15 जनवरी को यूपी पुलिस वेलफेयर ऐसोसिएशन के गठन की खबरें विभिन्न अखबारों में आना शुरू हो गई थी, मुझे संगठन में प्रदेश उपाध्यक्ष का पद दिया गया था जिसके बाद मैने उत्तर प्रदेश पुलिस वेलफेयर  एसोसिएशन का पंजीकरण आगरा में कराया और इस संस्था का संस्थापक बन गया  । इसी बीच 20 जनवरी को अपर पुलिस महानिदेशक रेलवे एके जैन ने मेरा ईएल अवकाश, जो 30 दिनी स्वीकृत था, को भी बिना किसी पूर्व सूचना दिये बीच में निरस्त कर जीआरपी गोरखपुर के लिये कार्यमुक्त कर दिया, लेकिन बाद में मिले सरकारी दस्तावेजों के आधार पर पता चला कि गोरखपुर के लिये तबादला कर दिया गया है, जब कि इस समय बीमारी के कारण मैंने ईएल अवकाश लेने के बाद घर पर रह कर उपचार करा रहा था।
सुबोध को मात्र 24 घंटे के भीतर ही गोरखपुर जा कर आमद कराने का आदेश दिया गया जब कि शासनादेश है कि एक सप्ताह का वक्त आमद के लिये मिलता है, ऐसे में सुबोध के खिलाफ आईपीएस अफसरों का उत्पीड़नात्मक रवैया यहीं से परीलक्षित हो गया था। 3 फरवरी को राजकीय रेलवे पुलिस, गोरखपुर के एसपी अमिताभ यश की ओर से निलंबित कर दिया गया है। राजकीय रेलवे पुलिस गोरखपुर अनुभाग के एसपी अमिताभ यश की ओर से 22 मार्च को पत्र सख्यां एस-29/2011 सुबोध को गुण दोष पर विचार किये बिना तत्काल प्रभाव से बहाल कर दिया गया। 2 मार्च को एक बार फिर से सुबोध को निलंबित कर दिया गया है।
सुबोध को पुलिस सेवा मे 16 साल काम करते हुये हो गये हैं और अपने हक की बात कहना क्या बुरा है? सुबोध का आरोप है कि आईपीएस अफसरों की घोटालेबाजी को लेकर आरटीआई का इस्तेमाल करना और पुलिस संगठन में काम करना आईपीएस अफसरों को रास नहीं आ रहा है,  इसी लिये निलंबन जैसी कार्रवाई करके उत्पीड़न करने में लग गये है और गैर कानूनी ढंग से मेरे खिलाफ अब बर्खास्तगी का दस्तावेजी कार्रवाई तैयार करने में लग गये हैं। सुबोध का कहना है कि अपने खिलाफ की जा रही बर्खास्तगी की कार्रवाई को लेकर उच्च न्यायालय की शरण लेंगे ताकि आईपीएस अफसरों को बेनकाब किया जा सके।
सुबोध यादव ने आरटीई डालकर ली जानकारी :  पुलिस विभाग में हर साल करोड़ों की धांधली का खुलासा हुआ है। यह रकम है लावारिस मुर्दों की, इसे भी विभाग के अफसर नहीं छोड़ रहे हैं। वे हर साल इस मद की रकम हड़प जाते हैं और खमियाजा भुगतते हैं दरोगा और सिपाही, जो इन लावारिस शवों का पोस्टमार्टम व अंतिम संस्कार कराने जाते हैं। बरसों से हो रही ज्यादती के खिलाफ उत्तर प्रदेश पुलिस एसोसिएशन के उपाध्यक्ष सुबोध यादव ने आवाज उठाई है और उन्होंने प्रदेश के प्रमुख सचिव गृह से उत्तर प्रदेश पुलिस के चार लाख अराजपत्रित पुलिस कर्मियों के लिए न्याय की मांग की है।
उत्तर प्रदेश पुलिस वेलफेयर  एसोसिएशन के संस्थापक  सुबोध यादव ने जनसूचना अधिकार अधिनियम 2005 के अंतर्गत उत्तर प्रदेश पुलिस के मुखिया से जानकारी मांगी थी कि लावारिस शवों के अंतिम संस्कार के लिए शासन द्वारा क्या व्यवस्था मुकर्रर की गई है और इस मद में कितना धन दिये जाने का प्रावधान है. लम्बी टालमटोल के बाद पुलिस विभाग ने 5 जुलाई 2010   में एक पत्र और शासनादेश की छाया प्रति, जो प्रदेश के महामहिम राज्यपाल द्वारा जारी है,  के द्वारा न सिर्फ उनकी शंकाओं का निवारण हुआ, बल्कि बेहद चौंकाने वाली जानकारी भी मिली. पुलिस मुख्यालय के जनसूचना अधिकारी अशोक कुमार अपर पुलिस अधीक्षक ने जानकारी दी कि शासनादेश संख्या स०- 1753/26-2-99-500(13)/99  दिनांक 16 जुलाई के तहत यह राशि 500 रुपये थी,  यह व्यवस्था 17 नवम्बर 2008 से लागू की गयी थी, जिसे उत्तर प्रदेश के राज्यपाल के साथ प्रदेश के वित्त विभाग ने भी मंजूरी दी थी।
महंगाई दर में लगातार वृद्धि के कारण 17  नवम्बर 2008 के शासनादेश संख्या. डब्लू- 1733/ 6-पु-08-1500 (11) 98 टीसी -11 दिनांक 17 नवम्बर 2008  द्वारा 1500 रुपया कर दी गयी थी. आदेश में प्रदेश के महामहिम राज्यपाल ने खर्च का वर्गीकरण भी किया था, जिसके तहत 1500 रुपये में 200  रुपये कफन के 6 मीटर कपडे पर, 900 रुपये शव दहन की लकड़ी या कब्र की खुदाई पर और बाकी 400 रुपये शव को कब्रिस्तान या श्मशान ले जाने के किराये पर खर्च के लिए निर्धारित किये गये थे।
इस सनसनीखेज खुलासे के बाद सुबोध यादव ने बताया कि उन्होंने आज प्रदेश के प्रमुख सचिव गृह को एक शिकायती प्रार्थना पत्र भेजा है,  जिस में प्रदेश के 4 लाख पुलिसकर्मियों के साथ हो रही ज्यादती पर न्याय करने की मांग की है। इसी प्रार्थना पत्र में सुबोध यादव ने कहा है कि प्रदेश के पुलिस कर्मियों को नहीं पता है कि लावारिस शवों के अंतिम संस्कार के लिए शासन द्वारा 1500 रुपये प्रदत्त किये जाते हैं। थोड़े पुलिस कर्मियों को रुपये मिलने का तो पता है मगर यह पता नहीं है कि इस मद में कितना भुगतान निर्धारित है। इस रकम के लिए मोटी लिखा-पढ़ी और लम्बे इन्तजार आईपीएस अफसरों से स्थानान्तरण विभागीय कार्रवाई के डर से पुलिसकर्मीं शासन के रुपयों का लालच छोड़ देते हैं और अपनी जेब से रुपया खर्च कर लावारिस शवों का अंतिम संस्कार कराते हैं। बर्खास्तगी के मुहाने पर खडे़ सुबोध यादव का कहना है कि चाहे कोई भी कार्रवाई की जाये वो अपने मिशन से पीछे हटने वाले किसी भी सूरत में नहीं है।  
नीरज महेरे

Saturday, August 20, 2011

ये हैं इटावा के अन्ना

 
 भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ने का क्रम नया नहीं है | नजाने
कितने  लोग इस  राक्षस   से लड़कर  टूट गए पर  झुके नहीं | अन्ना हजारे की
आवाज को पूरा देशइस लिए सुन सका के पदम् विभूषण से अलंकृत एक ख्यातिलब्ध
व्यक्ति ने मुंबई से आकर देश की राजधानी दिल्ली में भ्रष्टाचार के खिलाफ
आवाज उठाई | न जाने कितने अन्ना हजारे गाँव और कस्बों में आज भी जूझ रहे
हैं | बहुतों ने इस लड़ाई में सबकुछ खो दिया लेकिन झुके नहीं | इटावा शहर
के इस्लामियां इंटर कालेज के एक शिक्षक  सिद्धगोपाल सिंह  चोहान ने
शिक्षा विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार से लड़ने की बहुत बड़ी कीमत चुकाई |
उन्हें आदर्श शिक्षक के रूप में वर्ष १९९३ में मिला राज्यपाल पदक सन १९९७
में बापस करने पड़ा |
जिस शिक्षक को राज्यपाल अथवा राष्टपति पदक मिलता है उसे दो
वर्ष का सेवा विस्तार लाभ भी दिया जाता है | इस्लामियां इण्टर कालेज में
हिंदी के शिक्षक श्री चोहान ने जब सेवा विस्तारण के लिए आवेदन किया तो
शिक्षा निदेशालय में व्याप्त भ्रष्टाचार से उन्हें दो चार होना पड़ा |
उन्होंने बताया जब वे आवेदन करने गए तो उनसे कहा गया के दो साल में पूरा
वेतन मिलेगा इसलिए कुछ चढ़ौती चढ़ाएं | उन्होंने रिश्वत मागने की शिकायत
आलाह अफसरों से की | दो साल तक व्यवस्था से जूझते रहे | बिना कुछ लिए
बच्चों को पढ़ाते   रहे |जब वह किसी प्रकार की भ्रष्टाचारियों को शिकस्त
नहीं दे पाए तो उन्होंनेवर्ष १९९७ में प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र
लिखकर सम्मान में मिली धन राशि का ड्राफ्ट बनबाया , साल ,प्रसस्तीपत्र
मूल रूप में रजिस्टर्ड डांक से बापस कर दिया |
उनका हहना था कि जब हमें उस सम्मान के साथ मिले मदद स्वरूप दो
साल का सेवा विस्तार के लिए विभाग को पैसे देने पड़े तो फिर उस सम्मान का
ओचित्य शेष नहीं बचता | उत्तर प्रदेश की व्यवस्था का कमाल देखिये कि शाल
, पांच हजार रूपया का ड्राफ्ट व मूल प्रशस्ति पत्र सब जहाँ भेजा गया वहां
से एक साधारण जाँच भी नहीं आयी कि आखिर एक साधारण शिक्षक क्यों वापस कर
रहा है लेकिन श्री चोहान को बड़ा ही आत्मसंतोष हुआ | श्री चोहान बताते
हैं कि भ्रष्ट तंत्र से उनकी लढाई जारी है |

Saturday, August 13, 2011

चूहे छोडते है सबसे पहले डूबता जहाज


एक प्रचलि‍त कहावत है कि‍ जब कोई जहाज डूबने वाला होता है तो सबसे पहले चूहों को पता होता है और वो जहाज को छोडकर भाग जाते हैं। ऐसा ही वाक्याु जनपद इटावा में आज रंक्षाबंधन के पर्व पर को देखने को मि‍ला जब बसपा वि‍धायक शि‍व प्रसाद यादव ने राजनी‍ति‍ से संन्याास लेकर बर्षो पुरानी इस कहावत को चरि‍तार्थ कि‍या। बसपा सरकार के वि‍गत चार वर्षों के कार्यकाल में हत्यान, लूट, बलात्का र से जुडी घटनाओं में बसपा वि‍धायकों की संलि‍प्त ता जि‍स तरह सामने आती रहीं लगता अब बसपा वि‍धायक आत्मरग्लाेनि‍ से भर चुके हैं। प्रदेश के वि‍धायक इस कदर आत्मरग्ला नि‍ से भर गये कि‍ उन्हेंन राजनीति‍ से सन्याशस लेना ही अपनी कर्मों की सजा के रूप में देखा या फि‍र अगले वि‍धान सभा चुनाव में जनता से वोट मांगने की ये वि‍धायक हि‍म्म त नहीं रखते।
एक प्रचलि‍त कहावत है कि‍ जब कोई जहाज डूबने वाला होता है तो सबसे पहले चूहों को पता होता है और वो जहाज को छोडकर भाग जाते हैं। ऐसा ही वाक्याु जनपद इटावा में आज रंक्षाबंधन के पर्व पर को देखने को मि‍ला जब बसपा वि‍धायक शि‍व प्रसाद यादव ने राजनी‍ति‍ से संन्याास लेकर बर्षो पुरानी इस कहावत को चरि‍तार्थ कि‍या। बसपा सरकार के वि‍गत चार वर्षों के कार्यकाल में हत्यान, लूट, बलात्का र से जुडी घटनाओं में बसपा वि‍धायकों की संलि‍प्त ता जि‍स तरह सामने आती रहीं लगता अब बसपा वि‍धायक आत्मरग्लाेनि‍ से भर चुके हैं। प्रदेश के वि‍धायक इस कदर आत्मरग्ला नि‍ से भर गये कि‍ उन्हेंन राजनीति‍ से सन्याशस लेना ही अपनी कर्मों की सजा के रूप में देखा या फि‍र अगले वि‍धान सभा चुनाव में जनता से वोट मांगने की ये वि‍धायक हि‍म्म त नहीं रखते।
 

  इटावा 13 जुलाई - इटावा जिले की भरथना विधानसभा से  ब स प  एम् एल ए शिव  प्रसाद यादव ने आज राजनीति से संन्यास ले लिया | श्री यादव भरथना सीट रिजर्व हो जाने के कारण  इस बार  विधूना  से  प्रत्यासी थे | आज उन्होंने मिडिया को एक पत्र जारी कर ये बात बताई कि वे राजनीति से संन्यास लेलिये हैं | उन्होंने अपने पत्र में साफ़ लिखा है कि राजनैतिक  स्थितियां अनुकूल होने के कारण वे राजनीति से संन्यास ले रहे हैं | उन्होंने बसपा सुप्रीमो  मायावती की पार्टी से स्तीफा नहीं दिया है | श्री यादव ने अपने राजनैतिक जीवन में की पार्टियाँ भी बदलीं थी और वे सपा के राजनैतिक  धुर विरोधी माने जाते थे उन्होंने पिछले विधानसभा चुनाव में भरथना सीट से सपा मुखिया मुलायम सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ा था और वे १० हजार से भी कम मतों से हरे थे | मुलायम के स्थीफा देने के बाद वे यहाँ से विधायक हुए थे |