Saturday, August 20, 2011

ये हैं इटावा के अन्ना

 
 भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ने का क्रम नया नहीं है | नजाने
कितने  लोग इस  राक्षस   से लड़कर  टूट गए पर  झुके नहीं | अन्ना हजारे की
आवाज को पूरा देशइस लिए सुन सका के पदम् विभूषण से अलंकृत एक ख्यातिलब्ध
व्यक्ति ने मुंबई से आकर देश की राजधानी दिल्ली में भ्रष्टाचार के खिलाफ
आवाज उठाई | न जाने कितने अन्ना हजारे गाँव और कस्बों में आज भी जूझ रहे
हैं | बहुतों ने इस लड़ाई में सबकुछ खो दिया लेकिन झुके नहीं | इटावा शहर
के इस्लामियां इंटर कालेज के एक शिक्षक  सिद्धगोपाल सिंह  चोहान ने
शिक्षा विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार से लड़ने की बहुत बड़ी कीमत चुकाई |
उन्हें आदर्श शिक्षक के रूप में वर्ष १९९३ में मिला राज्यपाल पदक सन १९९७
में बापस करने पड़ा |
जिस शिक्षक को राज्यपाल अथवा राष्टपति पदक मिलता है उसे दो
वर्ष का सेवा विस्तार लाभ भी दिया जाता है | इस्लामियां इण्टर कालेज में
हिंदी के शिक्षक श्री चोहान ने जब सेवा विस्तारण के लिए आवेदन किया तो
शिक्षा निदेशालय में व्याप्त भ्रष्टाचार से उन्हें दो चार होना पड़ा |
उन्होंने बताया जब वे आवेदन करने गए तो उनसे कहा गया के दो साल में पूरा
वेतन मिलेगा इसलिए कुछ चढ़ौती चढ़ाएं | उन्होंने रिश्वत मागने की शिकायत
आलाह अफसरों से की | दो साल तक व्यवस्था से जूझते रहे | बिना कुछ लिए
बच्चों को पढ़ाते   रहे |जब वह किसी प्रकार की भ्रष्टाचारियों को शिकस्त
नहीं दे पाए तो उन्होंनेवर्ष १९९७ में प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र
लिखकर सम्मान में मिली धन राशि का ड्राफ्ट बनबाया , साल ,प्रसस्तीपत्र
मूल रूप में रजिस्टर्ड डांक से बापस कर दिया |
उनका हहना था कि जब हमें उस सम्मान के साथ मिले मदद स्वरूप दो
साल का सेवा विस्तार के लिए विभाग को पैसे देने पड़े तो फिर उस सम्मान का
ओचित्य शेष नहीं बचता | उत्तर प्रदेश की व्यवस्था का कमाल देखिये कि शाल
, पांच हजार रूपया का ड्राफ्ट व मूल प्रशस्ति पत्र सब जहाँ भेजा गया वहां
से एक साधारण जाँच भी नहीं आयी कि आखिर एक साधारण शिक्षक क्यों वापस कर
रहा है लेकिन श्री चोहान को बड़ा ही आत्मसंतोष हुआ | श्री चोहान बताते
हैं कि भ्रष्ट तंत्र से उनकी लढाई जारी है |

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