Saturday, June 4, 2011

90 लावारि‍स शवों को है अपनी शि‍नाख्त का इंतजार

 
 
इटावा- जनपद में वि‍भि‍न्न पुलि‍स थाना क्षेत्रों के अंतर्गत घटि‍त होने वाली दुर्घटनाओं में अनेक ऐसे लोग दुर्घटनाग्रस्‍त होकर अकाल मृत्यु के शि‍कार हुए है जि‍नकी शि‍नाख्त करने वाला कोई नहीं होता और ऐसे बदनसीब मृतकों के शवों को पुलि‍स लावारि‍स मान कर मुर्दाघ‍र पहुंचा देती है और ऐसे लोगों के कपड़े लत्ते व अन्य सामान काफी समय तक थाना पुलि‍स रखे भी रहती है लेकि‍न फि‍र भी कोई इन्हें पहचानने नहीं आता। वर्ष 2010 में जनवरी से लेकर अब तक मई 2011 तक का पुलि‍स रि‍कार्ड बताता है कि‍ कुल 220 लोग ट्रेन हादसे के शि‍कार हुए जि‍ससे 90 लावारि‍स लाशों की पहचान का संकट आज तक बरकरार है। अज्ञात रूप से मरने वालों में सार्वधि‍क वह लोग होते है जो ट्रेन में सफर के दौरान हादसे के शि‍कार होते है इनमें ऐसे भी होते है कुछ लोग आत्महत्या ट्रेन से कटकर कर लेते है तो कुछ सावधानीवश रेलवे ट्रेक पार करते समय मौत का शि‍कार हो जाते है वहीं कुछ लोग रेलगाड़ी की यात्रा करते समय कि‍सी न कि‍सी कारण गि‍रकर मर जाते है। यह आश्‍चर्यजनि‍क रहस्य आज तक बना हुआ है। कि‍ जनपद में इटावा  थाने का  रेलवे ट्रेक लगभग एक सौ कि‍लोमीटर के दायरे में रेलवे ट्रेक पर इस तरह की घटनाये लगभग रोजाना हो रही है। वर्ष 2011 जनवरी से लेकर दि‍सम्बर से मई तक 190 लोगों की मृत्यु हुई जि‍नमें 60 लोगों की शि‍नाख्त आज तक नहीं हो सकी इसी तरह वर्ष 2011 में जनवरी से लेकर अप्रैल माह तक 5 लोग ट्रेन की चपेट में आने से मरे जि‍नमें से कुल 20 लोगों की पहचान का संकट आज भी बरकरार है ये अज्ञात शव अपनी पहचान के लि‍ए मोहताज बने रहे और कि‍सी ने इनकी शि‍नाख्त नहीं की। क्या यह मान लि‍या जाए कि‍ इतने लोगों का इस दुनि‍या में कोई नहीं था। पुलि‍स की माने तो वह बराबर मृतक की शि‍नाख्त करने की प्रयास करती है। इस बारे में इटावा के जी आर पी  थानाध्यक्ष  अनिल कुमार  श्रीवास्तव बताते है कि‍ आज्ञात शवों के साथ समाचार पत्रों में भी प्रकाशन कराया जाता है। बावजूद इसके इन अभागे शवों की शि‍नाख्त नहीं हो पाती। घटना के समय शव के पास से मि‍ले सामान को पहचान के लि‍ए सुरक्षि‍त रखा जाता है ताकि‍ भवि‍ष्य में मृतक का कोई सम्बन्धी आकर पहचान कर सके। पुलि‍स के अनुसार लावारि‍स लाशों से सार्वधिक पूर्वांचल  के लोग पृतीत होते है ये लोग जनरल कोचों में सवार होते है। सामान्य डि‍ब्बों में भी भीड़ अधि‍क होने पर लोग ट्रेन में लटककर या कि‍नारे डि‍ब्बों के दरवाजे पर बैठ कर यात्रा करते है। जो कि‍सी प्रकार धक्के या नींद आने पर ट्रेन से गि‍रकर दुर्घटनाग्रस्त हो जाते है। इटावा जीआरपी थानाध्य‍क्ष बताते है कि‍ दुर्घटना के बाद जब तक पुलि‍स घटनास्थल पर पहुंचती है तब तक स्थानीय लोग मृतक का मोबाइल पर्स व अन्य सामान लूटकर चले जाते हैं इस कारण इनकी   पहचान के लि‍ए संकट खड़ा कर देते है। ऐसे में शव की पहचान के लि‍ए पुलि‍स का सि‍रदर्द और बढ़ जाता है। इसके अलावा एक बि‍डम्बना यह भी है कि‍ रेलवे एवं सि‍वि‍ल पुलि‍स दोनों ही केवल ट्रेक पर पर पड़ें शवों को उठाने तक ही सीमि‍त है। कई बार सीमा वि‍वाद में शव घंटों दुर्घटना स्थल पर पड़े रहते है। ऐसे में अनेक ट्रेने शव पर गुजरकर उसे क्षति‍ग्रस्त बना देती है तब तक शव इतने क्षति‍ग्रस्त हो जाते है कि‍ पुलि‍स द्वारा इन शवों के लोथड़ों को समेटना एक समस्या बन जाता है।
 neeraj mahere
nai duniya

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