एक युग था जब सपा काबिले के महामहिम मौलाना मुलायम का उड़नखटोला सरकारी खर्च पर अपने करीवियों के दुःख में सामिल होने के लिए और खुद को असली समाजबादी सिद्ध करने के लिए उतरता था तब पूजीबाद उनके निशाने पर रहता था अब वक़्त उलट चुका है |
माया ने मुलायम को मारा हुआ कहकर जो मनोवैज्ञानिक चोट की थी मुलायम उससे उबर नहीं सके हैं शायद यही कारण है कि वे अब सैफई को वैशाली बनाने की विलासी मुहीम में खुद भी डूब गये हैं जिसका प्रमाण उन्होंने अमर सिंह को निचा दिखाने के लिए बम्बईया सितारों को नचाकर दिया और सिद्ध किया कि जब विपक्ष का दाइत्व समझ में न आये तो दिल बहलाने के लिए कैवरे डांसरों को सैफई बुलाना ही श्रेष्ठ है | पता नहीं कैसे दर्शन सिंह के अग्रज की मौत पर रंगारंग जशन मानाने का फैसला उन्होंने पूंजी बाद की हत्या के लिए किया या समाजबाद की हत्या के लिए किया | या खुदा तू सैफई को वैशाली बनाने की कोशिश में जुटे विलाशियों को वैशाली का इतिहास पढ़ने लायक बना |
गणेश ज्ञानार्थी इटावा

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