आई पी एस अफसरों पर वे असर है महामहिम राज्यपाल का शासनादेश
इटावा १ मई : पुलिस विभाग में हर साल करोड़ों की धांधली का खुलासा हुआ है | यह रकम है लावारिस मुर्दों की , जिसे भी विभाग के अफसर नहीं छोड़ रहे हैं | वे हर साल इस मद की रकम हड़प जाते हैं और खमियाजा भुगतते हैं दरोगा और सिपाही जो इन लावारिस शबों का पोस्टमार्टम व अंतिम संस्कार कराने जाते हैं | बरसों से हो रही ज्यादती के खिलाफ इटावा जी आर पी में तैनात एक सिपाही ने आवाज उठाई है और उसने प्रदेश के महामहिम राज्यपाल से उत्तर प्रदेश पुलिस के चार लाख अराजपत्रित पुलिस कर्मियों के लिए न्याय की मांग की है |
उत्तर प्रदेश पुलिस एसोसिएशन के उपाध्यक्ष सुबोध यादव ने कुछ माह पहले जनसूचना अधिकार अधिनियम २००५ के अंतर्गत उत्तर प्रदेश पुलिस के मुखिया से जानकारी मांगी थी कि लावारिस शबों के अंतिम संस्कार के लिए शासन द्वारा क्या व्यवस्था मुक़र्रर की है और इस मद में कितना धन दिये जाने का प्रावधान है| लम्बी टाल मटोल के बाद पुलिस विभाग ने ५ जुलाई २०१० में एक पत्र और शासनादेश की छाया प्रति जो प्रदेश के महामहिम राज्यपाल द्वारा जारी है के द्वारा न सिर्फ उसकी शंकाओं का निवारण किया , बल्कि बेहद चोकने वाली जानकारी दी है | पुलिस मुख्यालय के जन सुचना अधिकारी अशोक कुमार अपर पुलिस अधीक्षक ने , शासनादेश संख्या स०-१७५३/२६-२-९९-५००(१३)/९९ दिनांक १६ जुलाई में ५०० रूपये थी यह व्यवस्था १७ नवम्वर २००८ से लागू की गयी थी जिसे उत्तर प्रदेश के राज्यपाल के साथ प्रदेश के वित्त विभाग ने भी मंजूरी दी थी |
महगाई दर से लगातार वृद्धी के कारण १७ नवम्वर २००८ शासनादेस संख्या:डब्लू-१७३३/६-पु-२-०८-१५००(११)/९८ टी.सी.-११ दिनांक १७ नवम्बर २००८ द्वारा १५०० रुपया कर दी गयी थी | आदेश में प्रदेश के महामहिम राज्यपाल ने खर्च का वर्गीकरण भी किया था जिसके तहत १५०० रूपये में २०० रूपये कफ़न के ६ मीटर कपडे पर , ९०० रूपये शव दहन की लकड़ी या कब्र की खुदाई पर और बाकी ४०० रूपये शव को कब्रिस्तान लेजाने के किराये पर खर्च के लिए निर्धारित किये गये थे | सनसनीखेज खुलासे के बाद सुवोध यादव ने नीरज महेरे को बताया कि उन्होंने आज प्रदेश के प्रमुख सचिव गृह को एक शिकायती प्रार्थना पत्र भेजा है जिसमे प्रदेश के ४ लाख पुलिस कर्मियों के साथ हो रही ज्यादती पर न्याय करने की मांग की है | इसी प्रार्थना पत्र में सुबोध यादव ने कहा है कि प्रदेश के पुलिस कर्मियों को नहीं पता है कि लावारिस शबों के अंतिम संस्कार के लिए शासन द्वारा १५०० रुपये प्रदत्त किये जाते हैं | थोड़े पुलिस कर्मियों को रूपये मिलने का तो पता है मगर यह पता नहीं है कि इस मद में कितना भुगतान निर्धारित है | इस रकम के लिए मोटी लिखापड़ी और लम्वे इन्तजार/ आई पी एस अफसरों से स्थानान्तरण / विभागीय कार्यवाही के डर से पुलिस कर्मीं शासन के रुपयों का लालच छोड़ देते हैं और अपनी जेब से रुपया खर्च कर लावारिस शबों का अंतिम संस्कार कराते हैं |
इस मद में शासन द्वारा मुकर्रर रकम कहाँ जाती है ये बात किसी भी सिपाही और दरोगा को नहीं पता है | सुबोध यादव का कहना है कि जल्द ही इस मामले की उच्च स्तरीय जांच करायी जाये और दोषी अफसरों के विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही कर मुकद्दमा चलाया जाये |
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