यादव और मुस्लिम मतदाताओं के दम पर प्रदेश की तीन बार सत्ता हथियाने बाले मुलायम ने अपने परिवार और कुछ नजदीकियों के अलावा किसी को फ़ायदा नहीं पहुंचने दिया और प्रदेश की जनता को लूटने का काम किया है | आज यह बात पीस पार्टी के अध्यक्ष डॉ अयूव अंसारी ने इटावा के नुमाइश मैदान में एक चुनावी जनसभा को संवोधित करते हुए कही | उन्होंने मुलायम पर आरोप लगते हुए कहा कि मुलायम ने अपने मुख्यमंत्रित्व काल में एक भी यादव को बिना पैसा लिए नौकरी नहीं दी है | उन्होंने कहा जो अपने समाज को नहीं बढा पाए वह देश का क्या भला कर पाएंगे | डॉ अयूव ने कहा कि इससे साफ़ हो जाता है कि मुलायम जब अपनी जातिबिरादारी के नहीं है तो मुसलमानों के हितैसी कैसे हो सकते हैं |
पीस पार्टी के अध्यक्ष डॉ अयूव ने सपा मुखिया के घर में उनपर जमकर निशाना साधते हुए कहा कि मुलायम ने मुसलमानों और हिन्दू भाइयों को कभी मन्दिर तो कभी मस्जिद के नाम पर लड़ाने का काम किया है | उन्होंने कहा मुलायम और मायावती कि सता के दौरान मुसलमानों का जितना कत्ले आम हुआ है उतना तो अंग्रेजी हुकूमत में भी नहीं हुआ और मुलायम ने मुसलमानों को बाबरी मस्जिद के नाम पर केवल लालीपॉप दिया है |
डॉ अयूव ने मायावती पर निशाना साधते हुए कहा कि ये वही मायावती हैं जो मुसलामानों के सबसे बड़े दुश्मन नरेंद्र मोदी की मदद में गुजरात गयीं थी | उन्होंने कहा कि मायावती को प्रदेश के विकास से कोई मतलब नहीं है न ही दलितों से कोई मतलव है उन्हें तो मूर्ति और पार्कों को बनवाने से ही फुर्सत नहीं है | उन्होंने कहा इनकी सत्ता में नीचे से ऊपर तक खुले आम भ्रष्टाचार हो रहा है और दलित ,मुसलमान ,ब्रह्मण सभी लूटे जा रहे हैं किसी को भी बक्सा नहीं जा रहा है | उन्होंने कहा प्रदेश से लेकर देश के सभी छोटे बड़े नेता देश कि जनता की महनत की कमाई को विदेशों में जमा करने में लगे हैं |
इटावा में पहलीवार इस तरह के किसी राजनैतिक पार्टी ने चुनावी जनसभा की जिसमे हजारों की संख्या में लोग इस भीषण गर्मी में अपने नेता का बेसबरी इन्जार करते रहे गोर तलब है कि इस गर्मी में डॉ अयूव को ११ बजे पहुचना था लेकिन वे दो घंटे देर से आये फिर भी लोगों ने पंडाल खली नहीं किया | इस जनसभा में डॉ अयूव अंसारी को देखने वालों में जियादातर मुस्लिम ही थे | वहीँ इस रैली के आयोजकों का मानना है कि मुसलमानों को लामबंद करने की यह कवायत लगभग सफल रही है जिसकी चर्चा अब गलियों तक भी पहुँच रही है |
नीरज महेरे / नई दुनिया/ इटावा
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