Monday, December 6, 2010

इटावा
नीरज महेरे 
आप ने पूरे देश में ये कहीं नहीं सुना और देखा होगा कि क्या मरने के बाद भी लोगों को काम करते हैं शायद  नहीं देखा होगा उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में आज कल येसा ही हो रहा है और तो और एक जगह नहीं एक ब्लाक में नहीं कई ब्लाकों में और कई गांवों में मुर्दे अपना जॉब कार्ड बनबा कर मनारेगा में काम कर रहे हैं और भुगतान भी पा रहे हैं | ये बड़ी बात नहीं है इससे भी बड़ी बात ये है कि उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के ब्लाक सैफई  में भी मुर्दे काम कर रहे हैं |        अधिकारी रोजाना अखबारों पढने के बाद  और मनारेगा निगरानी समिति के पदाधिकारियों की शिकायत के बाद भी चैन की नींद में सो रहे है और जांच का आश्वाशन देकर मुर्दों का भुगतान होते देख रहे हैं | एक और बड़ी बात ये है कि हस्ताक्षर  मिलाकर फोटो देखकर भुगतान करने का दावा   करने वाली ये बैंकें भी खुले आम बिन हस्ताक्षर  मिलाये और बिना फोटो देखे इनका भुगतान करने में जुटी हुई हैं | बड़ते भ्रष्टाचार को रोकने में नाकाम जिला प्रशासन जांच के झूठे  बादे करके कागजी कार्यवाही कर अपना पेट  भरने में जुटे हैं |   
           इटावा  के महेवा , सैफई और बढपुरा ब्लाकों में ग्राम प्रधान  और ग्राम विकास  अधिकारी मिलकर शासन और प्रशासन की आँखों में धूल झोंक कर मुर्दों से मनरेगा  का काम करवा कर अपनी जेबें भरने में लगे हैं और ग्रामीणों का जीवन स्तर सुधारने व गाँव में ही मजदूरी दिए जाने की योजना खटाई में पड़ती चली जा रही है | 
        मनरेगा  के तहत गाँव का विकास तो नहीं हो पा रहा है बल्कि सरकार के  धन का बन्दर बाँट  ग्राम विकास अधिकारी और प्रधान करके अपनी अपनी जेबें भरने में लगे है| ब्लाक महेवा , सैफई,जसवंतनगर और बढपुरा  की ग्राम पंचायतों दिलीप नगर, मंडौली,बिरोली,वेदपुरा,हजरतपुर  एवं कुनेरा के एम्आईएस फीडिंग में अनियमित्तयों बरतने एवं मृतक व्यक्तियों तक के नाम कार्यरत दिखाकर उनको भुगतान तक किये जाने आदि संबंधी शिकायत मनरेगा कमेटी द्वारा की गई थी | परिणाम  स्वरूप जिला विकास अधिकारी ने जाँच का जिम्मा जिला स्तरीय एक अधिकारी को सौंपा था और उनसे एक सप्ताह में जाँच रिपोर्ट देने को भी कहा था | लेकिन अभी तक कई माह गुजर जाने के बाबजूद क्या जाँच हुई,इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई |          

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