नीरज महेरे इटावा
उत्तर प्रदेश के इटावा चम्बल सेंचुरी क्षेत्र में एक मगरमच्छ और एक घड़ियाल की सप्ताह भर में मौत ने एक बार फिर वन्य जीव संरक्षकों के पेशानी पर बल दल दिए है | नवम्बर २००७ से जनवरी २००८ तक मौतों का सिलसिला ११५ का आकंडा छूने के बाद ही थमा था | यह आंकड़ा आशंकाओं के सहारे सहरन पैदा कर रहा है | मौतों की गुत्थी सुलझाने के लिए केन्द्र सरकार की अनुमति से डब्लू डब्लू ऍफ़ ने घडियालों में माइक्रो ट्रांसमीटर लगाने की योजना पर काम सुरु कर दिया है |
इंग्लेंड के क्रोकोडाइल विशेषज्ञ जैफ्रीलेंग और अमेरिका की शीना कोइथ को माइक्रो टेलीमेंट्री के लिए घड़ियाल कंवरजेशन एलाइंस चेन्नई ने अनुबंधित किया है | दोनों विशेषज्ञों ने १० घडियालों में माइक्रो ट्रांसमीटर लगाये हैं | इन ट्रांस मित्रों से घड़ियालो की गतिविधियों पर नजर रख कर उनकी मौतों के कारणों का पता लगाया जायेगा | माइक्रो ट्रांसमीटर २०० मीटर की गहराई या दूरी पर भी पूरण काम करेंगें तथा मुस्तैद अमला पल पल की कार्यशैली को समझेगा | इससे पहले दोनों विशेषज्ञों ने जून २००८ में ३० घडियालों में माइक्रो ट्रांसमीटर लगाये थे | यह बात दीगर है कि विशेषज्ञ अबतक किसी नतीजे पर नहीं पहुच सके हैं |
नवम्बर २००७ से जनवरी २००८ में मरे घडियालों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट इनकी मौत का कारन लीवर डैमेज होना बताती रही है | लीवर डैमेज क्यों हो रहा है यह दो साल बाद भी वन्य जीव वैज्ञानिको के लिए रहस्य बना हुआ है | माना यह भी जाता रहा है कि चम्बल सेंचुरी में शिकार प्रतिबंधित होने के बाबजूद मछली माफियों कि सक्रियता और उनके द्वारा अपनाये जाने वाले एक्सपिलोसिव तरीके घडियालों की मौत की एक बजह रही है | लेकिन सम्बंधित अधिकारीयों द्वारा इस बजह पर मोहर लगाना खुद को कटघरे में खड़ा करने वाला था | इसलिए वे इससे बचते रहे | गौरतलब है हाल ही में मगरमच्छ की मौत जाल में उलझ कर हुई थी | हालाँकि मुख्य वन संरक्षक डॉ आर पी भारती ने लगातार घडियालों एवं कछुओ के अण्डे चुराने की सूचनाओं को गंभीरता से लेते हुए डीएफो एन के जानू व उपवन संरक्षक वन्य जीव नीरज कुमार को सघन चेकिंग के निर्देश दिए थे |
स्काँन के महासचिव पर्यावरण विध डॉ राजीव चोहान का कहना है फोरेस्ट सिस्टम को मजबूत किये जाने , नियमित पेट्रोलिंग , मछली माफियाओं को राजनीतिक व्यक्तियों और पुलिस का समर्थन समाप्त करने तथा मछली माफियाओं पर कड़ी कार्यवाही किये जाने की जरुरत है | तभी इन विलुप्त होती प्रजातियों को बचापाना संभव हो सकेगा |
badiya jaankaari ke liye dhanyavaad...........
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